स्वास्थ्य

Summer Side Effects : गर्मी में पसीना और फंगल संक्रमण, बढ़ रही त्वचा संबंधी समस्याएं

Summer Side Effects : गर्मी और उमस से लोगों में स्किन की प्रॉब्लम्स तेजी से बढ़ रही हैं। खासकर फंगल इंफेक्शन (दाद, खाज, खुजली) के मामले इतने ज्यादा हैं।

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May 14, 2025
Summer Side Effects

Summer Side Effects : लगातार बढ़ रहे तापमान के बीच इन दिनों भीषण गर्मी की स्थिति है। इस भीषण गर्मी में पसीना होने से फंगल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। हर साल पूरे सीजन में 20 हजार से ज्यादा मरीज तो सिर्फ एमजीएम अस्पताल में सामने आते हैं। निजी अस्पतालों का आंकड़ा और भी ज्यादा है। इस बार भी प्रतिदिन 150 से ज्यादा मरीज इस बीमारी के सामने आ रहे हैं। इस बार बीमारी से ज्यादा चिंता इसके उपचार को लेकर है। क्योंकि इसका उपचार या दवाएं बीमारी पर काम नहीं कर रही। जो कॉम्बीनेशन चिकित्सक लिख रहे हैं वह मरीजों ने अपने स्तर पर लेकर शरीर को उन दवाओं के प्रति रेसिस्टेंस बना दिया है। हालात यह हैं कि उसके साइड इफेक्ट भी सामने आ रहे हैं।

Summer Side Effects : फंगल इन्फेक्शन के शरीर पर बनते चकत्ते और दाद

फंगल इन्फेक्शन के मरीज पूरे साल ही सामने आते हैं। दाद या अन्य इन्फेक्शन को ठीक करने के लिए लोग सीधे दवा की दुकान से दवाइयां खरीद कर उपयोग कर लेते हैं। लेकिन इसके अत्यधिक उपयोग से असर होना बंद हो गया है। कई दवाएं जो सीधे दुकानों से खरीद का लाई जा रही हैं उनमें स्टेरॉयड भी होता है।

Watch Video :Scratching Benefits: खुजलाने से मिलता है फायदा

Summer Side Effects : गर्मी और त्वचा से जुड़े तीन विकार

बैक्टीरियल इन्फेक्शन: गर्मी में होने वाले पसीना सामान्य बैक्टीरियल इन्फेक्शन है। इनमें बच्चों के मुंह के पास फफोले बनते हैं। यह संक्रामक भी होता है। इसी प्रकार छोटे फोड़े या त्वचा पर मुहासे होना भी बैक्टीरियल इन्फेक्शन की देन है।

फंगल इन्फेक्शन: इसमें खुजली के साथ लालगी आती है। यह आमतौर पर जांघों और बगल के आस-पास होता है। यह पसीने, उमस और गर्मी के कारण ज्यादा फैलता है। इसमें खुजली ज्यादा होती है और दाद हो जाते हैं। इसके अलावा शरीर पर सफेद या भूरे रंग के चकत्ते बन जाते हैं।

वायरस: इसमें बुखार के साथ वायरस अटैक करता है और शरीर पर लाल दाने हो जाते हैं। इसके अलावा हर्निया के मरीज भी काफी सामने आ रहे हैं।

संक्रमण का फैलाव ज्यादा

    मरीज स्टेरॉयड लेने के बाद जब इसे बंद किया जाता है तो दाद-खुजली वाले स्थान पर संक्रमण का फैलाव ज्यादा हो जाता है। जब यह कंट्रोल में नहीं आता तो मरीज को रेडिएशन व सर्जरी रहती है। चिकित्सकों को पास हर दिन इस तरह के मरीज भी आ रहे हैं।

    फैक्ट फाइल

    हर दिन 100 से ज्यादा फंगल इन्फेक्शन के मरीज।

    70 प्रतिशत मरीजों में दवाइयों के प्रति रेसिटेंट (यह स्थिति जब दवा के प्रति शरीर में प्रतिक्रिया बंद हो जाती है।)

    200 से ज्यादा मरीज ऐसे जिनको भीषण गर्मी में अन्य त्वचा संबंधी बीमारियां हो रही है।

    डॉ. डॉ. दिलीप कछवाहा, डॉ. पंकज सिंह वरिष्ठ चर्म रोग विशेषज्ञ, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज

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