Tea Benefits: JAMA Network (Journal of the American Medical Association) में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, रोजाना 1 से 2 कप चाय पीना आपके शरीर में डिमेंशिया के खतरे को कम करता है। आइए, डॉक्टर आदित्य सोनी (मनोचिकित्सक) से जानते हैं कि Dementia क्या होता है? इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय क्या हैं?
Tea Benefits: आपने आज तक कई लोगों से सुना होगा कि चाय पीने से शरीर को ये नुकसान होते हैं। आप इस बात को मानते भी होंगे कि ज्यादा चाय पीने से गैस्ट्रिक प्रॉब्लम होती है। लेकिन क्या आपने कभी यह बात सोची है कि आप जो रोजाना चाय पीते हैं, वही आपको डिमेंशिया जैसी गंभीर मानसिक समस्या से बचा सकती है?
जी हां, JAMA Network (Journal of the American Medical Association) में प्रकाशित एक रिसर्च के अनुसार, रोजाना 1 से 2 कप चाय पीना आपके शरीर में डिमेंशिया के खतरे को कम करता है। आइए, डॉक्टर आदित्य सोनी (मनोचिकित्सक) से जानते हैं कि Dementia क्या होता है? इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय क्या हैं?
चाय में केटेचिन और फ्लेवोनोइड्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो दिमाग की कोशिकाओं को बचाते हैं। दिमाग में होने वाली पुरानी सूजन डिमेंशिया का एक मुख्य कारण है। रिसर्च में देखा गया कि चाय के तत्व इस सूजन को रोकने में प्रभावी हैं। पर्याप्त मात्रा में चाय का सेवन मस्तिष्क की ओर रक्त के प्रवाह (Blood Flow) को बेहतर बनाता है, जिससे न्यूरॉन्स को बेहतर पोषण मिलता है।
डिमेंशिया से व्यक्ति की याददाश्त, सोचने की शक्ति और सामाजिक व्यवहार इतना प्रभावित होता है कि वह अपने रोजमर्रा के काम भी ठीक से नहीं कर पाता। अल्जाइमर (Alzheimer's) डिमेंशिया का सबसे आम रूप है।
चाय पीने से 10-15 मिनट पहले एक गिलास सादा पानी जरूर पिएं। चाय में सफेद चीनी की जगह गुड़ (चाय थोड़ी ठंडी होने पर डालें) या धागे वाली मिश्री का प्रयोग बेहतर है। चाय पीने का सबसे अच्छा समय नाश्ते के लगभग 1 से 2 घंटे बाद है। शाम 4 से 5 बजे के बीच हल्की चाय पीना ताजगी देता है। अगर आप रात 10 बजे सोते हैं, तो शाम 4 बजे के बाद चाय न पिएं।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।