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World No Tobacco Day 2026: तंबाकू से सिर्फ फेफड़े नहीं, होते हैं 30 प्रकार के कैंसर, युवाओं को ज्यादा खतरा

Tobacco Health Risks: विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तंबाकू सिर्फ फेफड़ों का नहीं, बल्कि 30 प्रकार के कैंसर का कारण बन सकता है। जानिए युवाओं में बढ़ते खतरे और इससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिम।

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भारत

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Dimple Yadav

May 30, 2026

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कैंसर और उनके शरीर पर प्रभाव को दर्शाती मेडिकल इलस्ट्रेशन (photo- chatgtp)

Tobacco Related Cancer: विश्व तंबाकू निषेध दिवस (31 मई) के अवसर पर, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और ऑन्कोलॉजिस्ट्स ने भारत में तंबाकू से जुड़े कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर एक गंभीर क्लिनिकल चेतावनी जारी की है। आमतौर पर तंबाकू को सिर्फ फेफड़ों के कैंसर से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन हालिया चिकित्सा साक्ष्यों के अनुसार, तंबाकू शरीर के अलग-अलग हिस्सों में लगभग 30 प्रकार के कैंसर का कारण बन रहा है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह संकट अब भारतीय युवाओं में तेजी से उभर रहा है।

30 प्रकार के कैंसर और तंबाकू का संबंध

ग्लोबल कैंसर रिसर्च और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के स्थापित आंकड़े दर्शाते हैं कि दुनिया भर में होने वाली कुल कैंसर मौतों में से लगभग एक-तिहाई (33%) मौतें सीधे तौर पर तंबाकू के सेवन के कारण होती हैं। भारत में स्मोकलेस तंबाकू (जैसे गुटखा, खैनी, जर्दा) का चलन बहुत अधिक है, जो सीधे तौर पर ओरल कैविटी को प्रभावित करता है।

मेडिकल रिसर्च के अनुसार, तंबाकू में मौजूद कार्सिनोजेन्स (कैंसर पैदा करने वाले तत्व) रक्त में घुलकर शरीर के उन अंगों तक भी पहुंचते हैं जिनका धूम्रपान से सीधा संपर्क नहीं होता। तंबाकू से प्रभावित होने वाले मुख्य कैंसरों की सूची और उनका क्लिनिकल वर्गीकरण इस प्रकार है:

  1. सिर, गर्दन और श्वसन प्रणाली के कैंसर (Head, Neck & Respiratory Cancers)
  • लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर): धूम्रपान (सिगरेट/बीड़ी) का सबसे प्रत्यक्ष और घातक परिणाम।
  • लैरिंजियल और फैरिंजियल कैंसर: आवाज ग्रंथि (Voice Box) और गले का कैंसर।
  • नेसोफैरिंजियल कैंसर: नाक और गले के पीछे के हिस्से का कैंसर।
  • ग्रासनली का कैंसर (Esophageal Cancer): भोजन नली का कैंसर, जिसके मामले युवाओं में बढ़ रहे हैं।
  1. पाचन तंत्र और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर (Gastrointestinal Cancers)
  • स्टमक कैंसर (पेट का कैंसर): तंबाकू के धुएं को निगलने या चबाने वाले रस के पेट में जाने से होता है।
  • पैनक्लिएटिक कैंसर (अग्न्याशय का कैंसर): यह बेहद आक्रामक और देर से डायग्नोस होने वाला कैंसर है।
  • लिवर और कोलोरेक्टल कैंसर: यकृत और बड़ी आंत का कैंसर, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म को ब्लॉक करता है।
  1. यूरोलॉजिकल और अन्य अंग-विशिष्ट कैंसर (Urological & Systemic Cancers)
  • रिनल और किडनी कैंसर: तंबाकू के टॉक्सिन्स जब यूरिन के जरिए फिल्टर होते हैं, तो किडनी की कोशिकाओं को डैमेज करते हैं।
  • यूरिनरी ब्लैडर कैंसर (मूत्राशय का कैंसर): तंबाकू सेवन करने वालों में इसका जोखिम सामान्य से तीन गुना अधिक होता है।
  • सरवाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर): तंबाकू महिलाओं के प्रजनन तंत्र की कोशिकाओं को भी प्रभावित करता है।
  • एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया (AML): यह रक्त का एक गंभीर कैंसर है, जो तंबाकू में मौजूद बेंजीन के कारण होता है।

युवाओं पर बढ़ता क्लिनिकल जोखिम

ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. दिनेश गुप्ता के अनुसार, अस्पतालों में अब बहुत कम उम्र के मरीज इन गंभीर कैंसरों के साथ पहुंच रहे हैं। तंबाकू नियंत्रण विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि तंबाकू के एक्सपोजर का कोई भी स्तर सुरक्षित (No Safe Level) नहीं होता। कैंसर का जोखिम पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि किसी व्यक्ति ने किस उम्र में इसका सेवन शुरू किया और इसकी तीव्रता कितनी है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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