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हर घंटे 5 भारतीय को निगल रहा मुंह का कैंसर! 2026 में इतने लाख केस! कैंसर सर्जन से जानिए तंबाकू और अन्य कारण

Oral Cancer AKA Muh Ka Cancer : भारत में 2026 मुंह के कैंसर को बढ़ा सकता है। नेशनल ओरल कैंसर रजिस्ट्री कहती है कि भारत में हर घंटे 5 मरीज मुंह के कैंसर से मर रहे हैं। आइए, कैंसर सर्जन डॉ. जयेश शर्मा से मुंह के कैंसर के कारण, बचाव आदि के बारे में जानते हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo - Gemini AI and Patrika

Oral Cancer AKA Muh Ka Cancer :फिल्म शुरू होने से पहले ओरल कैंसर का एक विज्ञापन आता है- मुकेश वाला... शायद आपको याद होगा! ये सरकार यूं ही नहीं दिखा रही है बल्कि इसके बढ़ते ग्राफ ने सबकी नींद उड़ा रखी है। अगर हम केवल मुंह के कैंसर की बात करें तो वो भारत के लिए चुनौती बनती दिख रही है। खासकर, पुरुषों के लिए ये जानलेवा समस्या है। साइंस डायरेक्ट पर प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, भारत में पुरुषों में ओरल कैंसर के मामलों में 2026 तक होंठ और मुख के कैंसर के मामलों की संख्या 1,31,414 होने का अनुमान है। साथ ही नेशनल ओरल कैंसर रजिस्ट्री की जानकारी के अनुसार, भारत में हर घंटे में 5 की मौत होती है।

Expert Tips : डॉ. जयेश शर्मा, कैंसर सर्जन के साथ बातचीत

डॉ. जयेश शर्मा, कैंसर सर्जन ने बताया कि ओरल कैंसर के सबसे अधिक मामले भारतीय पुरुषों में देखने को मिलते हैं। आने वाले समय पर अगर ध्यान नहीं दिया गया तो ये और भी बड़ी मुश्किल खड़ा कर सकता है। इसलिए, मुंह के कैंसर को लेकर कुछ बातों का समझना बेहद जरूरी है।

एक नजर में ओरल कैंसर समझिए

ओरल कैंसर भारत के लिए महासकंट!

साइंस डायरेक्ट पर प्रकाशित अध्ययन में, सभी कैंसरों का 40 प्रतिशत मुंह का कैंसर का केस है। 2026 से 2036 तक हर पांच साल में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कैंसर के मामलों के भविष्य के अनुमान हेतु कैंसर रजिस्ट्री डेटा का उपयोग किया गया। अनुमान के अनुसार, भारतीय पुरुषों में होंठ और मुख के कैंसर के मामलों की संख्या:

वर्षओरल कैंसर के संभावित केस
20261,31,414
20311,47,488
20361,63,224

ओरल कैंसर : भारत बनाम दुनिया

दरअसल, भारत में ओरल कैंसर के मामले अधिक हैं। खासकर, युवाओं में मुंह के कैंसर का खतरा अधिक है। आप उपरोक्त तस्वीर को देखकर साफ-साफ समझ सकते हैं किस तरह से मुंह कैंसर भारत के युवाओं को अपने गाल में समेट रहा है।

ओरल कैंसर के हर साल 1 लाख नए मामले

आंकड़े ये भी कहते हैं कि भारत में हर साल ओरल कैंसर के हर साल 1 लाख नए मामले सामने आते हैं। इस पर डॉ. जयेश कहते हैं कि अगर और अधिक स्क्रीनिंग की जाए तो ये आंकड़े और भी बढ़ सकते हैं।

कहां-कहां हो सकता है ओरल कैंसर

भारत में ओरल कैंसर से मौत

नेशनल ओरल कैंसर रजिस्ट्री के आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर घंटे करीब 5 लोगों की मौत मुंह के कैंसर से होती है। वहीं, ग्लोबोकेन और टाटा मेमोरियल (GLOBOCAN / Tata Memorial) की रिपोर्ट के अनुसार, ओरल (मुख) कैंसर के 50% - 55% मरीज दम तोड़ देते हैं।

ओरल कैंसर इतना घातक क्यों?

डॉ. जयेश ने बताया कि देर से निदान मौत का सबसे बड़ा कारण है। अक्सर हमारे पास भी अधिकतर मरीज काफी देर से आते हैं। इसी कारण उनको बचाना मुश्किल हो जाता है। साथ ही टाटा मेमोरियल सेंटर (TMC) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 48-50% ओरल कैंसर के मामले स्टेज 3 या 4 में पता चलते हैं।

तंबाकू बन रहा मौत का जरिया

डॉ. जयेश कहते हैं, ओरल कैंसर होने का सबसे बड़ा कारण है तंबाकू। आंकड़े बताते हैं कि मुंह के कैंसर के 90% मामले सीधे तौर पर तंबाकू सेवन से जुड़े हैं। भारत दुनिया में ओरल कैंसर की राजधानी की तरह है क्योंकि, यहां तंबाकू (गुटखा, खैनी, सिगरेट) का सेवन बहुत अधिक है। इसके अलावा ये निम्नलिखित कारण भी हैं जो मुंह के कैंसर को जन्म देते हैं-

  • शराब का अत्यधिक सेवन
  • ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV)
  • दांतों की समस्या
  • खराब पोषण

तंबाकू और शराब का कॉम्बिनेशन सबसे खतरनाक

जो व्यक्ति शराब और तंबाकू दोनों का सेवन करता है उसके लिए कैंसर होने का खतरा 15 गुना बढ़ जाता है, क्योंकि शराब तंबाकू के रसायनों को कोशिकाओं में सोखने में मदद करती है। इसलिए, इन दोनों चीजों से दूरी बनानी जरूरी है।

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ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV)

हाल के वर्षों में HPV-16 वायरस ओरल और गले के कैंसर (Oropharyngeal cancer) का सबसे बड़ा कारण बना है। यह मुख्य रूप से असुरक्षित ओरल सेक्स के माध्यम से फैलता है।

ओरल कैंसर के संकेत (Oral Cancer Symptoms)

डॉ. जयेश ने बताया कि अगर आप तंबाकू या गुटखा, शराब का सेवन करते हैं तो आपको अधिक सचेत होने की जरुरत है। ऐसे लोगों में निम्नलिखित लक्षण दिखे तो जांच करा लेना चाहिए-

  • मुंह में सफेद (Leukoplakia) या लाल (Erythroplakia) धब्बे।
  • ऐसा घाव जो 2-3 हफ्ते में ठीक न हो।
  • मुंह खोलने में कठिनाई या आवाज में बदलाव।
  • जीभ या मसूड़ों में बिना दर्द वाली गांठ

मुंह के कैंसर के 80-90% मरीज ठीक हो जाते हैं- डॉ. जयेश

ओरल कैंसर पुरुषों का सबसे कॉमन कैंसर है और महिलाओं में भी सबसे कॉमन कुछ कैंसर में से एक कह सकते हैं। इसे स्टेज जीरो में भी पकड़ा जा सकता है। उस टाइम पर करीब करीब हंड्रेड परसेंट सक्सेस मिलता है। स्टेज वन स्टेज टू में 80 से 90 परसेंट लोग ठीक हो जाते हैं। इवन स्टेज थ्री में ज्यादातर लोग ठीक हो जाते हैं। सिर्फ स्टेज फोर तक हमको उसको पहुंचने नहीं देना है। उसी टाइम पर सबसे ज्यादा प्रॉब्लम्स होती हैं। भारत में करीब 70 परसेंट लोग स्टेज 3 और स्टेज 4 में आते हैं। इसी कारण हम बहुत सारे लोगों को देखते हैं कि उनके स्वस्थ होने के रिजल्ट अच्छे नहीं हैं।

डॉ. जयेश कहते हैं कि सरकार शराब-सिगरेट ना पीने को लेकर जागरूकता फैला रही है। खाना है या नहीं, ये फैसला हमें करना है। अगर आपको कैंसर का खौफ है और अपने अलावा परिवार की चिंता है तो इससे दूरी बनाने में भलाई है। साथ ही लक्षण आदि दिखने पर फौरन जांच कराना और डॉक्टर से संपर्क भी करें ताकि समय पर इलाज हो पाए।