Thermal Shock in Summer: गर्मियों में हम अक्सर ठंडे कमरे से निकलकर सीधे चिलचिलाती धूप में चले जाते हैं। यह छोटी सी लापरवाही आपके दिल और दिमाग पर भारी पड़ सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि तापमान का यह अचानक बदलाव शरीर के सिस्टम को हिला देता है, जिससे स्ट्रोक या हार्ट फेलियर तक का खतरा रहता है।
Thermal Shock in Summer: राजस्थान की इस झुलसा देने वाली गर्मी में पारा 45-48 डिग्री तक पहुंच रहा है। ऐसे में हम कूलर या एसी की 20-25 डिग्री वाली ठंडक में बैठे रहते हैं और काम पड़ने पर अचानक बाहर धूप में निकल जाते हैं। शरीर के लिए यह बदलाव किसी सदमे से कम नहीं है। इसे मेडिकल की भाषा में 'थर्मल शॉक' कहते हैं। जैसे तपते तवे पर अचानक पानी डालने से धुआं निकलता है, कुछ वैसा ही असर हमारे शरीर के अंगों पर भी पड़ता है।
जब आप एकदम ठंडी जगह से बेहद गर्म जगह पर जाते हैं, तो आपकी नसें अचानक फैलने लगती हैं। इससे ब्लड प्रेशर एकदम से ऊपर-नीचे होता है। हमारे दिल को शरीर का तापमान सेट करने के लिए बहुत तेजी से पंप करना पड़ता है। अगर आपका शरीर इस झटके को सहन नहीं कर पाता, तो व्यक्ति बेहोश हो सकता है या उसे ब्रेन स्ट्रोक आ सकता है।
हमारा शरीर अंदरूनी तापमान को हमेशा 37°C के आसपास बनाए रखने की कोशिश करता है। जब हम अचानक 20-22 डिग्री वाले ठंडे AC कमरे से निकलकर सीधे 45 डिग्री की धूप में जाते हैं, तो शरीर के इस तापमान कंट्रोल सिस्टम को संभलने का मौका नहीं मिलता। शरीर के अंगों पर पड़ने वाले इसी अचानक दबाव या झटके को थर्मल शॉक कहते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।