स्वास्थ्य

यह तरीका ब्लड शुगर को 50 परसेंट तक कंट्रोल करने में करेगा आपकी मदद

एक चिकित्सा विशेषज्ञ (medical specialist ) ने शुगर लेवल को एक आसान एक्सरसाइज से काम करना बताया है यह खास उन लोगों के लिए है जिन्हें जिम जाकर वर्कआउट करने में बहुत आलस्य आता है ।एक स्टडी से पता चला है की, यह बैठकर किया जाने वाला एक्सरसाइज ब्लड शुगर को 52 प्रतिशत तक कम करता है।
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Updated: 20 Jul 2023, 3:09 PM IST
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This method will help you to control blood sugar up to 50%

This method will help you to control blood sugar up to 50%: यह तरीका ब्लड शुगर को 50 परसेंट तक कंट्रोल करने में करेगा आपकी मदद

एक चिकित्सा विशेषज्ञ (medical specialist ) ने शुगर लेवल को एक आसान एक्सरसाइज से काम करना बताया है यह खास उन लोगों के लिए है जिन्हें जिम जाकर वर्कआउट करने में बहुत आलस्य आता है ।
एक स्टडी से पता चला है की, यह बैठकर किया जाने वाला एक्सरसाइज ब्लड शुगर को 52 प्रतिशत तक कम करता है। इस एक्सरसाइज को सोलियस पुश-अप्स (Soleus Push-Ups) के नाम से भी जाना जाता है।

यह उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जिन्हें पीठ, कूल्हे या घुटने की समस्या बहुत अधिक रहती है या फिर उनके लिए जिनके पास एक्सरसाइज करने का टाइम नहीं है । इसमें अपने पैर की उंगलियों को नीचे धकेलकर अपनी एड़ियों को हर मिनट में लगभग 50 बार ऊपर और नीचे करना होता है और उससे होने वाले दर्द को सेहन करते रहो ।

सोलियस पुश-अप्स की पूरी प्रोसेस से धीरे-धीरे हिलने वाली मसल्स फाइबर को खींचती हैं क्यूंकि मसल्स एनर्जी को इकट्ठा करने के लिए ग्लाइकोजन की मदद नहीं लेतीं हैं ,यह सीधे ब्लडफ्लो में ग्लूकोज का ही इस्तेमाल करती करती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल कम हो जाता है। न केवल शुगर लेवल, बल्कि ये पुश-अप्स कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी इफ़ेक्ट करता है खासकर अगर आप डेस्क जॉब करते हैं और चल नहीं सकते या अक्सर ब्रेक नहीं ले सकते।

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स्टडी से पता चला है कि बैठने के टाइम को बार-बार रोककर सोलियस पुश-अप्स करने से खाने के बाद ब्लड शुगर लेवल कम होता है और इंसुलिन सेंस्टिविटी बढ़ती है। शुगर मेलिटस और मोटे लोगों को आराम आराम से चलना चाहिए । ग्लाइसेमिक पर कंट्रोल के लिए हल्की पैदल चाल और सोलियस पुश-अप्स को एक साथ किया जा सकता है।

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स्पेशलिस्ट के अनुसार इस एक्सरसाइज को करते समय कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए :

इंजरीज:
किसी भी एक्सरसाइज की तरह, गलत टेक्नीक और ज्यादा काम के से चोट लग सकती है। हल्के वजन से शुरुआत करनी चाहिए और टाइम के साथ धीरे-धीरे उसे करने की प्रेक्टिस बढ़ा देनी चाहिए । अगर आप इस एक्सरसाइज को करते वक़्त अपने निचले पैर में ज्यादा दर्द महसूस हतो तुरंत ;उसे करना बंद कर दें ।

जॉइंट्स प्रॉब्लम :
जॉइंट्स की परेशानी के अलावा एंकल या घुटनों में दर्द वाले लोगों को इस एक्सरसाइज को न करने की ही सलाह दे जाती है अगर फिर भी आप इसे करना चाहते है तो एक बार अपने डॉक्टर सेसलाह लेना जरूरी है ।

पहले से मेडिकल कंडीशंस है हैं तो :
हेइ ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज पेशेंट्स को इस एक्सरसाइज को सावधानी से करना चाहिए और इसके साथ ही अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए ।

प्रेग्नेंट औरतें :
प्रेग्नेंट औरतों को इस एक्सरसाइज को भी यह नहीं करने की सलाह दी जाती है अगरयादि वह इसे करना चाहतीं है तो अपने डॉक्टर से सलाह लेकर कर सकती हैं ।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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