स्वास्थ्य

Tumour Treatment: बिना ऑपरेशन गायब हो जाएगा ट्यूमर! यूके ने बनाई इसकी पहली रामबाण दवा

Tumour Treatment: यूके की MHRA ने डेस्मॉइड ट्यूमर के इलाज के लिए पहली दवा निरोगैसेस्टैट को मंजूरी दी। जानें इसके फायदे, असर और साइड इफेक्ट।

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Jan 10, 2026
Tumour Treatment (Photo- gemini ai)

Tumour Treatment: यूके की दवा नियामक संस्था MHRA (Medicines and Healthcare products Regulatory Agency) ने एक नई दवा निरोगैसेस्टैट हाइड्रोब्रोमाइड (Ogsiveo) को डेस्मॉइड ट्यूमर से पीड़ित वयस्क मरीजों के इलाज के लिए मंजूरी दे दी है। यह यूके में इस दुर्लभ बीमारी के लिए पहली अधिकृत दवा है। इससे पहले अगस्त 2025 में इसे यूरोपीय आयोग की भी मंजूरी मिल चुकी है।

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क्या होते हैं डेस्मॉइड ट्यूमर

डेस्मॉइड ट्यूमर शरीर के कनेक्टिव टिश्यू में बनते हैं और आमतौर पर हाथ, पैर या पेट में पाए जाते हैं। ये कैंसर की तरह शरीर में फैलते नहीं हैं, लेकिन पास के अंगों और नसों में घुसकर उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं। इनका ऑपरेशन करना अक्सर मुश्किल होता है और सर्जरी से मरीज को गंभीर परेशानियां भी हो सकती हैं। अब तक यूके में इनके लिए कोई खास दवा उपलब्ध नहीं थी।

कैसे काम करती है निरोगैसेस्टैट

निरोगैसेस्टैट एक टारगेटेड दवा है, जो शरीर में ट्यूमर बढ़ाने वाले खास सिग्नलिंग सिस्टम (Notch pathway) पर असर डालती है। इससे ट्यूमर की ग्रोथ धीमी होती है और कई मामलों में उसका आकार भी कम हो सकता है। यह पहली ऐसी दवा है, जो खास तौर पर डेस्मॉइड ट्यूमर के लिए बनाई गई है।

स्टडी में क्या सामने आया

इस दवा की मंजूरी Phase-3 DeFi ट्रायल के नतीजों पर आधारित है। इस ट्रायल में 142 मरीज शामिल थे। आधे मरीजों को निरोगैसेस्टैट और आधे को प्लेसिबो दिया गया। नतीजों में पाया गया कि निरोगैसेस्टैट लेने वाले मरीजों में बीमारी बढ़ने या मौत का खतरा 71% तक कम हो गया। दो साल बाद 76% मरीजों में बीमारी आगे नहीं बढ़ी, जबकि प्लेसिबो ग्रुप में यह आंकड़ा 44% था। करीब 41% मरीजों में ट्यूमर का साइज कम हुआ और कुछ मरीजों में तो ट्यूमर पूरी तरह खत्म भी हो गया। साथ ही, इन मरीजों को सर्जरी की जरूरत भी कम पड़ी और दर्द व शारीरिक दिक्कतों में सुधार देखा गया।

साइड इफेक्ट और सावधानियां

इस दवा के कुछ आम साइड इफेक्ट हैं। दस्त, उलटी, थकान, त्वचा पर रैश, सिरदर्द और मुंह में छाले। एक गंभीर खतरा समय से पहले मेनोपॉज का है, जो हर 10 में से 1 से ज्यादा महिलाओं में हो सकता है। यह दवा गर्भ में पल रहे बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है और पुरुष व महिला दोनों की फर्टिलिटी पर असर डाल सकती है। इसलिए इलाज के दौरान सख्त गर्भनिरोधक उपाय जरूरी हैं।

दवा की सुरक्षा पर लगातार नजर

MHRA ने कहा है कि मरीजों की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है और दवा की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जाएगी। कुल मिलाकर, यह मंजूरी डेस्मॉइड ट्यूमर से जूझ रहे मरीजों के लिए एक बड़ी राहत और नई उम्मीद लेकर आई है।

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Published on:
10 Jan 2026 02:20 pm
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