
नई दिल्ली। Vaccination: बीसीजी (बैसिलस कैलमेट-गुएरिन) को पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले टीके में से एक है। ये टीका सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है। इस टीके की मांग शिशुओं में अधिक है। क्योंकि हर साल लगभग 10 करोड़ के ऊपर बच्चों को ये टीका लगता है। अब धीरे-धीरे बदलते हुए समय के अनुसार टीकों के फायदे सामने आए हैं। अब बुजुर्गों में भी इसे लगवाने कि रुचि बढ़ गई है। खासतौर पर उन देशो में जहां covid-19 के मामले सबसे ज्यादा मिले हैं।
एक और रिसर्च में बताया गया है कि बीसीजी टीकाकरण श्वसन पथ के संक्रमण से बचाता है और हमें सुरक्षा प्रदान करता है। जिसमें ये वायरल संक्रमण भी शामिल है।
साइंस एडवांस जर्नल में छपे एक लेख के अनुसार ये बताया गया है कि बीसीजी संभावित रूप से कोशिका यानी प्रतिरक्षा कोशिका द्वारा सूजन को रोकने के लिए काम करता है।
आईसीएमआर नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ एपिडेमियोलॉजी और आईसीएमआर नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन ट्यूबरकुललोसिस के शोधकर्ताओं की एक टीम ने बताया है कि यह बात अभी भी नहीं पता है कि यह निरोधात्मक प्रभाव कितने लंबे समय तक बना रह सकता है।
रिसर्च में कुछ बातें और भी कही गई हैं- जैसे कि रिसर्च में यह बताया गया है कि हाल ही में बीसीजी टीकाकरण हाइपरइन्फलेमेशन से जुड़ा हुआ नहीं है। लेकिन इसके बदले में डाउन मॉडुलेशन बेसेल इंफ्लेमेटरी स्थिति से जुड़ा हुआ है। जो बुजुर्ग आबादी में सूजन संबंधी बीमारियों के खिलाफ सुरक्षात्मक भूमिका निभा सकता है।
रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा है की इसके अलावा यह संभव है कि रोगजनक विशिष्ट प्रतिरक्षा (एंटीबॉडी) बीसीजी टीकाकरण से प्रभावित ना हो या इसके अतिरिक्त विपरीत वास्तविक्ता में बढ़ी हों।
रिसर्च के दौरान इस बात को कहा गया है कि बीसीजी टीकाकरण सुरक्षित है। बीसीजी टीकाकरण का प्रभाव भी सुरक्षित है। इस टीकों के प्रयोग से बुजुर्ग व्यक्तियों में सूजन नहीं बढ़ती है। इस शोध में बीसीजी टीकाकरण के इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुणों की पुष्टि करते हैं।
इसके साथ ही टीम ने आगे बताया है कि वो टीके की प्रभावकारिता के बारे में अच्छे से बता सकती है और बीसीजी टीकाकरण के नए-नए अनुप्रयोगों का पता लगा सकती है।
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