वॉकिंग निमोनिया (Walking pneumonia) के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के स्थान पर निर्भर करते हैं। यदि बच्चे का संक्रमण फेफड़ों के ऊपरी या मध्य हिस्से में है, तो उसे सांस लेने में कठिनाई हो सकती है
Walking pneumonia: सर्दी के मौसम में लोगों को खांसी की समस्या बनी रहती है जिसे वे नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आपको पता है यह वॉकिंग निमोनिया के भी संकेत हेा सकते हैं। वॉकिंग निमोनिया (walking pneumonia) फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर बीमारी होती है जो माइकोप्लाज्मा न्यूमोनिया बैक्टीरिया के कारण होती है। इस बीमारी में हमें घर पर ही रहना चाहिए जब तक एंटीबायोटिक उपचार शुरू न हो जाए।
जब आपकी खासी 7 से 10 तक बनी रहे और यह दिनों दिन बढ़ती रहे तो इसके पीछे का कारण वॉकिंग निमोनिया हो सकता है। इसके लक्षण हल्के होने के साथ गंभीर भी हो सकते हैं।
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लक्षण
वॉकिंग निमोनिया के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के स्थान पर निर्भर करते हैं। यदि बच्चे का संक्रमण फेफड़ों के ऊपरी या मध्य हिस्से में है, तो उसे सांस लेने में कठिनाई हो सकती है। दूसरी ओर, यदि संक्रमण फेफड़ों के निचले हिस्से (पेट के निकट) में है, तो उसे सांस लेने में कोई समस्या नहीं हो सकती, लेकिन उसे पेट में दर्द, मतली या उल्टी का अनुभव हो सकता है। जैसे कुछ लक्षण इस प्रकार है
101°F (38.5°C) या उससे कम बुखार, एक खांसी जो हफ्तों से लेकर महीनों तक बनी रह सकती है, थकान (अत्यधिक थकावट का अनुभव), सिरदर्द, ठंड लगना, गले में खराश और सर्दी या फ्लू, जैसे अन्य लक्षण, तेज़ सांस लेना या घुरघुराहट के साथ सांस लेना, सांस लेने में कठिनाई,
सीने या पेट में दर्द, अस्वस्थता (बेचैनी का अनुभव), उल्टी, भूख न लगना (बड़े बच्चों में) या शिशुओं में ठीक से खाना न खाना, चकत्ते, जोड़ों में दर्द आदि समस्या रहना।
डॉक्टर सामान्यतः एक परीक्षण के माध्यम से वॉकिंग निमोनिया (walking pneumonia) का निदान करते हैं। वे बच्चे की श्वास की जांच करेंगे और एक विशेष ध्वनि सुनेंगे, जो अक्सर वॉकिंग निमोनिया का संकेत होती है। यदि आवश्यक समझा जाए, तो वे निदान की पुष्टि के लिए छाती का एक्स-रे या बच्चे के गले या नाक से बलगम के नमूनों की जांच करने का निर्देश दे सकते हैं।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।