Kerala Alert: केरल में West Nile Fever के संदिग्ध मामले सामने आने के बाद हेल्थ अलर्ट जारी किया गया है। यह वायरस मच्छरों के काटने से फैलता है और 80% लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखते। कुछ मामलों में यह दिमाग और नर्वस सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। जानिए इसके लक्षण, जोखिम और बचाव के आसान तरीके।
West Nile Virus Symptoms: केरल में वेस्ट नाइल फीवर के संदिग्ध मामले सामने आने के बाद हेल्थ विभाग ने अलर्ट जारी किया है। एलांजी, एरूर, पल्लिक्कारा, पोनक्करा और पल्लुरुथी जैसे इलाकों में केस मिलने की खबर है। ऐसे में लोगों को सावधान रहने और बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है।
यह एक वायरल बीमारी है, जो मच्छर के काटने से फैलती है। ये वायरस पहले पक्षियों में पाया जाता है और फिर मच्छरों के जरिए इंसानों तक पहुंचता है। अच्छी बात ये है कि ज्यादातर लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखते। अमेरिकी हेल्थ एजेंसी Centers for Disease Control and Prevention के मुताबिक करीब 80% लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्हें संक्रमण हुआ है। 20% लोगों में फ्लू जैसे लक्षण दिखते हैं।
कुछ मामलों में यह बीमारी दिमाग और नर्वस सिस्टम को भी प्रभावित कर सकती है, जैसे एन्सेफलाइटिस (दिमाग में सूजन), मेनिन्जाइटिस गंभीर लक्षणों में बहुत तेज बुखार, गर्दन अकड़ना, कन्फ्यूजन, झटके (सीजर्स) शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
World Health Organization के अनुसार, हर 150 में से 1 व्यक्ति में यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
यह बीमारी इंसान से इंसान में नहीं फैलती। यह सिर्फ संक्रमित मच्छर के काटने से होती है। इसलिए मच्छरों से बचाव सबसे जरूरी है।
केरल जैसे राज्यों में बारिश और नमी के कारण मच्छर तेजी से पनपते हैं। ऐसे में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अभी सतर्क रहना बहुत जरूरी है।
अगर बुखार, सिरदर्द या कमजोरी लंबे समय तक बनी रहे, या कोई गंभीर लक्षण दिखें, तो तुरंत जांच करवाएं। यह बीमारी ज्यादातर मामलों में हल्की होती है, लेकिन लापरवाही करने पर गंभीर भी हो सकती है। इसलिए मच्छरों से बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।