
Cold Shower Side Effects (Photo- chatgtp)
Heatstroke Prevention Tips: गर्मी अपने चरम पर है और तापमान 42-45°C तक पहुंच चुका है। ऐसे में ठंडे पानी से नहाने का मन करना बिल्कुल आम बात है। लगता है कि बर्फ जैसा ठंडा पानी ही तुरंत राहत देगा। लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ये तरीका जितना अच्छा लगता है, उतना फायदेमंद नहीं होता बल्कि कई बार नुकसान भी कर सकता है।
जब आप ठंडे पानी से नहाते हैं, तो आपकी स्किन तुरंत ठंडी हो जाती है और अच्छा महसूस होता है। लेकिन असल में शरीर के अंदर कुछ और ही चल रहा होता है। ठंडे पानी के संपर्क में आते ही शरीर की ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती हैं (इसे वेसोकंस्ट्रिक्शन कहते हैं)। इससे स्किन तक खून का फ्लो कम हो जाता है और शरीर की अंदर की गर्मी बाहर निकल नहीं पाती। यानी बाहर से ठंडा, लेकिन अंदर से शरीर गर्म ही रहता है और यही वजह है कि कुछ देर बाद फिर से गर्मी लगने लगती है।
हीटवेव के दौरान शरीर पहले से ही स्ट्रेस में होता है और खुद को ठंडा रखने की कोशिश कर रहा होता है। ऐसे में अचानक बहुत ठंडा पानी डालने से शरीर को झटका लग सकता है। इसके कुछ नुकसान हो सकते हैं। अचानक चक्कर आना या दिल की धड़कन तेज होना, ब्लड प्रेशर बढ़ जाना, शरीर की गर्मी बाहर न निकल पाना और गंभीर मामलों में हीटस्ट्रोक का खतरा।खासतौर पर बुजुर्ग, बच्चे या जिन लोगों को दिल या बीपी की समस्या है, उनके लिए यह और ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है।
एनवायर्नमेंटल फिजियोलॉजिस्ट डॉ. जैक रेमिन्की (Dr. Zach Schlader) ने बताया कि "ठंडे शावर से तुरंत राहत तो मिलती है, लेकिन यह शरीर को 'धोखा' देता है। शरीर को लगता है कि उसे ठंड लग रही है, और वह शरीर का आंतरिक तापमान (Core Temperature) कम करने के बजाय उसे सुरक्षित रखने की कोशिश करने लगता है। इसकी तुलना में हल्का गुनगुना पानी पसीना आने और गर्मी बाहर निकलने की प्रक्रिया को चालू रखता है।"
NHS (National Health Service, UK) की गाइडलाइन के अनुसार हीटवेव के दौरान अत्यधिक ठंडे पानी से नहाने से बचना चाहिए क्योंकि यह 'कोल्ड शॉक' (Cold Shock) का कारण बन सकता है। खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें दिल की बीमारी है, यह खतरनाक हो सकता है। शरीर को ठंडा रखने का सबसे प्रभावी तरीका गुनगुने पानी का उपयोग है, क्योंकि यह रक्त के प्रवाह को त्वचा की सतह तक लाता है जिससे गर्मी बाहर निकलती है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
27 Apr 2026 04:39 pm
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