Gloves do not Prevent Infection : विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि दस्ताने संक्रमण से सुरक्षा जरूर देते हैं, लेकिन ये हाथ धोने की जगह नहीं ले सकते।
Gloves do not Prevent Infection: पहले हम ज्यादातर लोग हाथों के दस्तानों (gloves) के बारे में ज़्यादा सोचते भी नहीं थे। लेकिन जब कोरोना महामारी आई तो मास्क और हैंड सैनिटाइज़र की तरह दस्ताने भी एकदम जरूरी चीज बन गए।
आज भी दस्ताने चुपचाप अपना काम कर रहे हैं। ये इन्फेक्शन (संक्रमण) फैलने से रोकने में बहुत मदद करते हैं खासकर हॉस्पिटल में किसी बीमार या बुज़ुर्ग की देखभाल करते टाइम या फिर खाना बनाते/बेचते टाइम।
दस्तानों को ऐसे समझो कि ये तुम्हारी सुरक्षा की पहली दीवार हैं। ये सीधे जर्म्स (कीटाणु), वायरस और गंदे बैक्टीरिया को तुम्हारे हाथ से चिपकने से रोकते हैं - वो जर्म्स जो कहीं भी हो सकते हैं, जैसे किसी सतह पर, शरीर के फ्लूइड्स में या कच्चे खाने में भी।
और हां, जो लोग हॉस्पिटल में काम करते हैं (डॉक्टर, नर्स वगैरह) उनके लिए तो दस्ताने पहनना जरूरी है। ये सिर्फ़ ग्लव्स नहीं हैं, ये सच में जान बचाते हैं!
आजकल तो दस्ताने हर जगह दिखने लगे हैं। पार्लर (सैलून) में भी और जो लोग सड़क किनारे ठेले पर खाना वगैरह बेचते हैं वो भी इन्हें इस्तेमाल कर रहे हैं। लोग अब ज़्यादा ध्यान से दस्ताने पहन रहे हैं ताकि जर्म्स (कीटाणु) एक चीज़ से दूसरी चीज पर न फैलें।
कोविड के बाद ये बात लोगों के दिमाग में एकदम पक्की बैठ गई है कि गंदे हाथों से ज़ुकाम जैसी छोटी-मोटी चीज़ों से लेकर बड़ी खतरनाक बीमारियाँ (जैसे E. coli) तक फैल सकती हैं। और ये अच्छी बात है कि लोग अब इस बात को समझ रहे हैं।
इसीलिए आजकल डिस्पोज़ेबल (इस्तेमाल करके फेंकने वाले) दस्ताने खासकर नाइट्राइल और लेटेक्स वाले बहुत ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं। लोग इन्हें सिर्फ अपने बचाव के लिए नहीं पहन रहे, बल्कि ये एक तरह से ये दिखाने का तरीका भी बन गया है।
एक जरूरी बात वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) ने कही है। WHO का कहना है कि दस्ताने पहनना हाथों को साफ रखने की जगह नहीं ले सकता।
उन्होंने ये 'विश्व हाथ स्वच्छता दिवस' (World Hand Hygiene Day) पर कहा था कि ये सच है कि मेडिकल ग्लव्स (जो डॉक्टर-नर्स वगैरह इस्तेमाल करते हैं) इन्फेक्शन फैलने से रोकने में बहुत काम आते हैं, खासकर जब खून या किसी मरीज के शरीर के फ्लूइड्स के संपर्क में आने का खतरा हो…
…पर इसका मतलब ये नहीं कि आप सही टाइम पर हाथ धोना या सैनिटाइज़ करना छोड़ दें। हाथ साफ करना सबसे जरूरी है, दस्ताने उसका विकल्प नहीं हैं।
लोग अक्सर दस्ताने पहन कर मोबाइल, दरवाज़े, चेहरा सब छू लेते हैं—ये मान कर कि वे अब सुरक्षित हैं। लेकिन अगर दस्तानों पर बैक्टीरिया या वायरस चिपक गया, और आप उसी हाथ से आंख मसल ली? तो संक्रमण का खतरा अब भी बना है।
एक ही जोड़ी दस्तानों को कई घंटों तक पहनना, अलग-अलग चीजों को छूना—ये सब संक्रमण को एक जगह से दूसरी जगह फैलाने का कारण बनते हैं। दस्ताने तभी मददगार हैं जब उन्हें सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए और बार-बार बदला जाए।
WHO की रिपोर्ट बताती है कि दस्तानों के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण पर भी भारी असर पड़ रहा है।
एक विश्वविद्यालय अस्पताल साल भर में 1600 टन से ज्यादा मेडिकल वेस्ट पैदा करता है। इनमें से अधिकांश दस्ताने होते हैं जिन्हें खास तरीके से नष्ट करना पड़ता है।
दस्ताने ज़रूरी हैं—लेकिन हाथ धोना और भी जरूरी
दस्ताने पहनिए, लेकिन हर बार बदलिए
दस्ताने पहनने से पहले और बाद में हाथ जरूर धोइए
दस्तानों के साथ चेहरा छूने से बचिए
लेटेक्स एलर्जी जैसी समस्याओं के प्रति सतर्क रहिए
दस्ताने एक ज़रूरी औज़ार हैं, लेकिन वे अकेले काफी नहीं हैं। संक्रमण से बचना है तो साफ़ हाथों की आदत बनाइए। याद रखिए ढके हुए हाथ नहीं, साफ़ हाथ असली सुरक्षा देते हैं।