Women Heart Attack Symptoms: दिल की बीमारी सिर्फ पुरुषों की नहीं, महिलाओं की भी सबसे बड़ी जानलेवा समस्या है। जानिए महिलाओं में हार्ट अटैक के छिपे लक्षण, जोखिम और बचाव के आसान तरीके।
Women Heart Attack Symptoms: दिल की बीमारी को अक्सर पुरुषों की समस्या माना जाता है, लेकिन सच यह है कि दुनिया भर में महिलाओं की मौत का सबसे बड़ा कारण हार्ट डिजीज ही है। फिर भी महिलाओं में हार्ट अटैक अक्सर पहचान में नहीं आता या देर से पकड़ा जाता है। इसकी बड़ी वजह यह है कि महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों जैसे क्लासिक नहीं होते।
पुरुषों में आमतौर पर सीने में तेज दर्द, दबाव या दर्द का हाथ तक फैलना हार्ट अटैक का सामान्य लक्षण माना जाता है। लेकिन महिलाओं में लक्षण काफी अलग और हल्के हो सकते हैं। जैसे सांस फूलना, उल्टी या मितली, बहुत ज्यादा थकान या कमजोरी, जबड़े, गर्दन, पीठ या पेट में दर्द, चक्कर या हल्का महसूस होना। ये लक्षण इतने सामान्य लगते हैं कि महिलाएं अक्सर इन्हें गैस, थकान, तनाव या वायरल समझकर नजरअंदाज कर देती हैं।
दिल के विशेषज्ञ Dr. Aseem Dhall ने Times Now Health को बताया कि महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर साइलेंट होते हैं। यानी दर्द बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता, जिससे बीमारी पकड़ में नहीं आती।
इसके पीछे कई कारण हैं। दर्द को नजरअंदाज करना- कई महिलाएं अपनी परेशानी को गंभीर नहीं मानतीं और सोचती हैं कि यह सिर्फ थकान या तनाव है। मेडिकल नजरिया- कभी-कभी डॉक्टर भी युवा महिलाओं में हार्ट डिजीज की संभावना कम मानते हैं, जिससे जांच में देरी हो जाती है। साइलेंट हार्ट अटैक- महिलाओं में बिना तेज दर्द के भी हार्ट अटैक हो सकता है, जिससे पहचान और मुश्किल हो जाती है।
महिलाओं के शरीर में कुछ खास बदलाव हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ाते हैं, जैसे:
अगर इसके साथ धूम्रपान, मोटापा, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर भी हो, तो खतरा और बढ़ जाता है।
हार्ट अटैक में हर मिनट बहुत कीमती होता है। महिलाएं अक्सर देर से अस्पताल पहुंचती हैं क्योंकि उन्हें समझ ही नहीं आता कि ये हार्ट से जुड़ी समस्या है। इलाज में देरी होने से दवाओं और स्टेंट जैसे उपचार का असर कम हो जाता है और जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
महिलाओं में हार्ट अटैक हमेशा तेज दर्द के साथ नहीं आता। यह धीरे-धीरे, चुपचाप और भ्रमित करने वाले संकेतों के साथ भी हो सकता है। इसलिए अगर कुछ असामान्य लगे। चाहे लक्षण छोटे ही क्यों न हों, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। जागरूकता और समय पर इलाज ही जान बचा सकता है।