स्वास्थ्य

World Cancer Day 2026: 2050 तक क्या हर घर में होगा कैंसर का मरीज? आपकी प्लेट में छुपा है खतरा

World Cancer Day 2026: कैंसर सिर्फ जेनेटिक नहीं, बल्कि खाने की आदतों से भी जुड़ा है। ज्यादा शुगर, प्रोसेस्ड फूड और मोटापा कैसे बढ़ाते हैं कैंसर का खतरा, जानें।

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Feb 04, 2026
World Cancer Day 2026 (photo- gemini ai)

World Cancer Day 2026: कैंसर आज दुनिया भर में मौत के प्रमुख कारणों में से एक है। एक ऐसी बीमारी जिसका कारण सीधे तौर पर कोई नहीं बता सकता। जेनेटिक कारण यानी परिवार में किसी को कैंसर, प्रदूषण, कमजोर इम्युनिटी, खराब लाइफस्टाइल मोटे तौर पर इन कारणों को कैंसर के लिए जिम्मेदार माना जाता है। लेकिन अब कई रिसर्च ये दावा करती हैं कि कैंसर हमारी खाने पीने की आदतों की वजह से भी हो सकता है।

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कैंसर के लिए मीठा जहर चीनी

अब तक कैंसर को ऐसी बीमारी माना जा रहा था जो DNA में गड़बड़ी के कारण होती है। लेकिन हालिया रिसर्च के मुताबिक कैंसर सिर्फ जीन की गलती नहीं है। हमारे शरीर के सेल्स एनर्जी कैसे बनाते हैं, इसका भी बड़ा रोल है। हमारे शरीर का हर सेल यानी कोशिका, चाहे वह सामान्य हो या कैंसर वाला सेल एनर्जी के लिए ग्लूकोज यानी शुगर का इस्तेमाल करते हैं। यह शुगर हमें सिर्फ चीनी से नहीं मिलती। हालांकि चीनी सबसे तेजी से ग्लूकोज यानी शुगर बनाने के लिए जिम्मेदार होती है। सब्जियों, फलों, गेंहूं चावल जैसे अनाज और डेयरी प्रोडक्ट से भी कार्बोहाइड्रेट यानी ग्लूकोज बनता है। कई रिसर्च में सामने आया है कि खाने में मौजूद शुगर सीधे तौर पर सामान्य कोशिकाओं की तुलना में कैंसर ट्यूमर को ज्यादा पोषण देती है। ज्यादा शुगर और कार्बोहाइड्रेट वाला खाना खाने से शरीर को जरूरत से अधिक कैलोरी मिलती है, जिससे वजन बढ़ता है और शरीर में फैट जमा हो जाता है। चर्बी यानी मोटापे को ब्रेस्ट कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर, किडनी, पेट और प्रोस्टेट के कैंसर के लिए जिम्मेदार माना गया है।

दिल्ली एनसीआर के जाने माने कैंसर सर्जन डॉ अंशुमन कुमार के मुताबिक अगर डायट में ग्लूकोज कम से कम कर दिया जाए, तो कैंसर सेल्स भूखे रहेंगे और खतरा कम हो जाएगा। कुछ डॉ कैंसर के इलाज के साथ साथ मरीज को कीटोन आधारित डायट भी देते हैं जिससे इलाज में मदद मिलती है। इसमें चीनी के अलावा गुड़, शक्कर और खांड भी आते हैं।

खाने की शेल्फ लाइफ ज्यादा?

दिल्ली के बीएलकपूर मैक्स अस्पताल से जुड़े इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ विवेक पाल सिंह के मुताबिक रेडी टू ईट खाने में ऐसे प्रिजरवेटिव और केमिकल होते हैं जो कैंसर के सो रहे सेल को जगा सकते हैं। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल की रिसर्च के मुताबिक पोटैशियम सोर्बेट (potassium sorbate) कैंसर का खतरा 14% तक बढ़ सकता है। ये केमिकल केक-पेस्ट्री, ब्रेड, जैम जैली की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और उसे फंगस से बचाने के लिए इस्तेमाल होता है। सोडियम नाइट्राइट से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा 30% से ज्यादा बढ़ सकता है। ये प्रोसेस्ड मीट, रेडी टू ईट नॉनवेज खाने में इस्तेमाल होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर रजिस्ट्री IARC प्रोसेस्ड मीट को कैंसरकारी कैटेगरी में रखती है। सफलाइट्स को जूस, बीयर और वाइन का कलर बनाए रखने और देर तक चलाने के लिए डाला जाता है इससे कैंसर का खतरा 12% तक बढ़ सकता है।

कैंसर से बचाने वाला खाना

कैंसर से बचाने में ब्रोकली, फूलगोभी और पत्तागोभी जैसी सब्जियां अच्छी मानी गई हैं। इसके अलावा रंग बिरंगे फल जैसे बेरीज, संतरा, और अनार एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं, जो सेल्स के लिए अच्छे माने गए हैं। टमाटर में पाया जाने वाला लाइकोपीन, हल्दी की एंटी इंफ्लामेटरी ताकत प्रोस्टेट और ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक माना जाता है। इसी तरह लहसुन को इम्युनिटी बढ़ाने में कारगर माना जाता है। साबुत अनाज और दालें पाचन और हार्मोन दोनों को अच्छी स्थिति में रखते हैं जिससे कैंसर का खतरा कम हो सकता है।

कैंसर और मोटापा - इकॉनॉमिक सर्वे में वॉर्निंग

भारत सरकार का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26, जिसे संसद में पेश किया गया, उसमें भी देश में मोटापे के बढ़ते बोझ को साफ तौर पर स्वीकार किया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि जंक फूड और पैकेट बंद तैयार खाना खाने से भारत में मोटापा बढ़ रहा है। सर्वे के मुताबिक इस खाने में ज्यादा शुगर, फैट, नमक और प्रिजरवेटिव्स होते हैं, जिससे बच्चे और भारत के युवा मोटापे के शिकार होकर कई बीमारियों को दावत दे रहे हैं।

खाने में ही छुपा है कैंसर का इलाज ?

विश्व स्वास्थय संगठन के मुताबिक दुनिया में 20 करोड़ लोग कैंसर के शिकार हैं। 2050 तक दुनिया भर में कैंसर के शिकार लोगों की संख्या हर साल साढे तीन करोड़ की दर से बढ़ सकती है, जो फिलहाल 2 करोड़ से कम है। भारत में दिल के मरीज और कैंसर के मरीजों की संख्या में ज्यादा अंतर नहीं है। भारत की सबसे बड़ी रिसर्च संस्था ICMR के मुताबिक 2025 में भारत में कैंसर के कुल मामले 15 लाख से ज्यादा थे। औसतन भारत में हर एक लाख लोगों में से करीब 100 लोगों में कैंसर होने का खतरा है। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन ये भी मानता है कि अगर लोग अपना लाइफस्टाइल सुधार लें तो कैंसर का खतरा 30 से 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

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Updated on:
04 Feb 2026 06:46 am
Published on:
04 Feb 2026 06:30 am
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