सांप बहुत ही जहरीला जानवर होता है। अगर गलती से यह सिकी को काट ले तो इंसान की जान भी जा सकती है। अगर सांप सामने आ जाए तो अच्छे अच्छे लोगों की हालत पतली हो जाती है। हालांकि कुछ लोग इनको पालते है लेकिन वे खुद का और अपने परिवार को खास ध्यान रखते है।
नई दिल्ली। सांप बहुत ही जहरीला जानवर होता है। अगर गलती से यह सिकी को काट ले तो इंसान की जान भी जा सकती है। अगर सांप सामने आ जाए तो अच्छे अच्छे लोगों की हालत पतली हो जाती है। हालांकि कुछ लोग इनको पालते है लेकिन वे खुद का और अपने परिवार को खास ध्यान रखते है। म्यांमार में वलिथा नाम के एक बौद्ध भिक्षु को सांपों से बहुत प्यार है। वह इनको अपने घर में पालते है और देखभाल करते है। ऐसा कहा जाता है कि वलिथा ने अब तक कई जहरीले सांपों की जान बचाई है।
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गमछे से करते है सांपों की सफाई
म्यांमार के यांगून में ठुका टेटो मठ में 69 साल के बौद्ध भिक्षु विलेथा ने अजगर और कोबरा समेत कई सांपों के लिए आश्रय स्थल बनाया हुआ है। उन्होंने ऐसा इन जहरीले सांपों की काला बाजारी का शिकार होने से जान बचाई है। वे इन जहरीले सांपों को अपने बच्चों की तरह रखते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, वे पिछले पांच साल से यह काम कर रहे है। वहां रहने वालों के अलावा, सरकारी एजेंसियां भी भिक्षुओं द्वारा पकड़े सांपों को बाद में उनसे लेकर जंगल में छोड़ देती हैं। अपने गमछे के जरिए सांपों की सफाई करने वाले बौद्ध भिक्षु विलेथा ने बताया कि वह प्रकृति के पारिस्थितिक चक्र की रक्षा कर रहे हैं।
बच्चों की तरह मानते हैं सांपों को
वलिथा का कहना है कि वे यह सब करके एक ओर सांपों को तो बचा ही रहे है जबकि दूसरी ओर वे इकोलॉजिक बैलेंस बनाने में मदद कर रहे हैं। विलेथा सांपों को संरक्षण में तब तक रखते हैं जब तक उन्हें लगता है कि वो जंगल में छोड़े जाने के लिए तैयार नहीं हैं। वलिथा का कहना है कि सांप मेरे लिए बच्चों की तरह हैं। इन भिक्षुओं को सांपों को खिलाने के लिए लगभग 300 अमरीकी डॉलर के दान पर निर्भर रहना पड़ता है। खबरों के अनुसार, म्यांमार अवैध वन्यजीव व्यापार का केंद्र बन गया है, जिससे ज्यादातर चीन और थाईलैंड जैसे देशों में तस्करी होती है।