
नई दिल्ली: खाने-पीने की चीजों में वैसे तो कई चीजें जरूरी है, लेकिन देखा जाता है कि लगभग हर साल ही प्याज लोगों को रूलाता है। प्याज के बढ़ते दाम लोगों के खाने का स्वाद बिगाड़ रहा है। देश के कई राज्यों में प्याज ( Onion ) की खुदरा बाजार में कीमत सौ रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि आखिर प्याज के दाम आसमान कैसे छूते हैं।
मानसून बना बड़ा कारण
भारत में इन दिनों प्याज ने लोगों को परेशान कर रखा है। ऐसे में प्याज के बढ़ते दामों की वजह मौसम की मार को माना जा रहा है। दरअसल, जून और जुलाई में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में सूखे का दौर था। सूखे के कारण या तो यहां प्याज की बुआई नहीं हो सकी या फिर पानी की कमी के चलते खराब हो गई। ऐसे में पानी ने प्याज के दाम को महंगा करने में बड़ा रोल निभाया। इसके बदा प्याज की दूसरी बुआई के दौरान लौटते मानसून ने इसकी फसल को चौपट कर दिया। महाराष्ट्र में लौटते मानसून के दौरान जबरदस्त बारिश हुई थी। ये समय वो था जब वहां के खेतों में प्याज की फसल खड़ी थी। तेज बारिश ने इस फसल को चौपट कर दिया।
प्याज पर राजनीति
वहीं अब प्याज पर राजनीति भी जारी है। हालांकि, ये पहली बार नहीं जब प्याज को लेकर राजनीतिक पार्टियां धरना दे रही हैं। प्याज पर साल 1980 में पहली बार राजनीति शुरू हुई थी और इसके बाद ये सिलसिला जारी रहा। साल 1998, 2010, 2013 और 2015 में भी प्याज को लेकर राजनीति रोटियां सेंकी गई। वहीं दिल्ली सरकार ने लोगों को सस्ता प्याज उपलब्ध करवाने के लिए कई जगहों पर सेंटर खोले हैं। वहीं साल 1998 में दिल्ली विधानसभा का चुनाव में जिन मुद्दों का शोर सबसे अधिक सुनाई दिया था उसमें एक प्याज भी था। इस चुनाव में शीला दीक्षित के नेतृत्व में कांग्रेस ने भाजपा को महज 14 सीटों पर समेट दिया था जबकि उसकी 53 सीटें थीं।