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क्या पजामा पहनकर वर्क फ्रॉम होम करने से प्रोडक्टिविटी कम होती है?

वर्क फ्रॉम होम ( work from home ) में पजामा पहनने से पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अध्ययन। अंतरराष्ट्रीय शोध से पता चलता है कि पजामा पहनना से प्रोडक्टिविटी कम नहीं होती। हालांकि, शोध में पता चला कि यह मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

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Does work from home with pyjamas lower productivity? Study denies

नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी (COVID-19) के दौरान पजामा पहनकर घर से काम करने ( work from home ) को लेकर काफी चर्चा हो चुकी है। कई लोगों का मानना था कि पजामा पहनकर वर्क फ्रॉम होम से उत्पादकता (प्रोडक्टिविटी) कम हो जाती है। हालांकि एक ताजा शोध में इस बात का खंडन किया गया है और बताया गया है कि ऐसा नहीं होता।

वूलकॉक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय सिडनी और सिडनी विश्वविद्यालय के साथ मिलकर एक अध्ययन किया गया, जिसमें उत्पादकता और मानसिक स्वास्थ्य पर पजामा पहनने के प्रभावों की जांच की गई।

zdnet.com के अनुसार, इस शोध में करीब 41 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्होंने घर से काम करते समय उत्पादकता में वृद्धि का अनुभव किया। लेकिन एक तिहाई से अधिक उत्तरदाताओं ने कहा कि ऐसा खराब मानसिक स्वास्थ्य के कारण हुआ।

शोध के निष्कर्ष के मुताबिक, 26 प्रतिशत प्रतिभागियों (जिन्होंने घर से काम करते समय पजामा नहीं पहना था) की तुलना में 59 प्रतिशत प्रतिभागियों (जिन्होंने सप्ताह में कम से कम एक दिन पजामा पहना था) ने माना कि घर से काम करते समय उनका मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ा था।

अध्ययन में उल्लेख किया गया है, "जबकि हम यह निर्धारित नहीं कर सकते हैं कि पजामा पहनना मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने का कारण या परिणाम था, लेकिन अनुभूति और मानसिक स्वास्थ्य पर कपड़ों के प्रभाव की सराहना बढ़ रही है, जैसा कि अस्पताल के रोगियों में देखा जाता है। मरीजों को सामान्य दिन के कपड़े पहनने के लिए प्रोत्साहित करना अवसाद की गंभीरता को कम कर सकता है।"

शोध में आगे कहा गया, "सुबह काम शुरू करने से पहले कपड़े बदलने वाली साधारण सलाह, आंशिक रूप से मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले COVID-19 प्रतिबंधों के प्रभावों से रक्षा कर सकती है, और यह घर से काम करते समय लोकप्रियता हासिल करने वाली 'फैशनेबल’ स्लीप या लाउंजवियर की तुलना में कम खर्चीला होगा।"

शोध के निष्कर्षों को मेडिकल जर्नल ऑफ ऑस्ट्रेलिया में प्रकाशित किया गया है। यह सर्वेक्षण 30 अप्रैल से 18 मई के बीच गर्वन इंस्टीट्यूट, चिल्ड्रेंस मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट, सेंटेनरी इंस्टीट्यूट और ब्रेन एंड माइंड सेंटर सहित वूलकॉक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च के कर्मचारियों, छात्रों और सहयोगियों पर किया गया था।

Updated on:
16 Dec 2020 08:51 pm
Published on:
16 Dec 2020 08:44 pm
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