अकिहितो ने 3 दशक तक जापान में किया शासन । अपने आखिरी भाषण में लोगों का शुक्रियाअदा किया । बेहद रोमांचक है इनकी लव स्टोरी ।
85 साल के अकिहितो दो सदियों में ऐसे पहले सम्राट थे जिन्होंने विश्व युद्ध ( World War ) की कड़वी यादों को कम करने के लिए खुद ही अपनी गद्दी छोड़ दी थी, और वो आम जनता को राजा के करीब लेकर आए थे।
लोकप्रिय अकिहितो, युद्ध के बाद के संविधान के तहत गुलदाउदी सिंहासन लेने वाला पहला सम्राट था जो बिना राजनीतिक शक्ति के लोगों के प्रतीक के रूप में सम्राट को परिभाषित करता था।
उनके पिता, हिरोहितो, के नाम पर जापानी सैनिकों ने द्वितीय विश्व युद्ध लड़ा था। हिरोहितो को 1945 में जापान की हार के बाद एक जीवित देवता माना जाता था, जब उन्होंने अपनी दिव्यता को त्याग दिया था।
पश्चिमी शैली के मॉर्निंग कोट पहने अकिहितो ने इम्पीरियल पैलेस के मात्सु नो मा, या हॉल ऑफ पाइन में एक उद्घाटन समारोह में कहा कि, "प्रतीक के रूप में मुझे स्वीकार करने और समर्थन करने वाले लोगों के लिए, मैं अपना हार्दिक धन्यवाद व्यक्त करता हूं।"
ऐसे हुआ था अकिहितो को प्यार
आपको बता दें कि अकिहितो ने 1500 साल की अपनी पारिवारिक परंपरा को तोड़ते हुए, एक आम घर की लड़की से शादी की थी और उनका ये प्यार टेनिस कोर्ट में परवान चढ़ा था। अकिहितो को साल 1959 में प्यार हुआ था और उन्होंने मिचिको नाम की महिला से शादी की जो उनकी महारानी बनीं।