-Fact Check: बिहार के जहानाबाद जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया ( Coronavirus Rumors ) पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि लॉकडाउन ( Coronavirus Lockdown ) के चलते भूख से तड़पत रहे बच्चे मेंढक खाने ( Children Eating Frogs ) को मजबूर है।-सरकारी एजेंसी पीआईबी ( PIB Fact Check ) ने अपने फेक्ट चेक में इस खबर को झूठा करार दिया है।-जहानाबाद के डीएम नवीन कुमार ने कहा कि ऐसी अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नई दिल्ली।
भारत समेत पूरी दुनिया इस समय कोरोना ( coronavirus ) संकट से जूझ रही है। देश में अब तक 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि, 14 हजार से ज्यादा लोग इसकी जद में आ चुके है। कोरोना वायरस ( COVID-19 Updates ) के चलते इन दिनों सोशल मीडिया ( Coronavirus Rumors ) पर भी अफवाहों का जबरदस्त जोर है। हाल ही में बिहार के जहानाबाद जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि लॉकडाउन ( Coronavirus Lockdown ) के चलते भूख से तड़पत रहे बच्चे मेंढक खाने ( Children Eating Frogs ) को मजबूर है। इस वीडियो के माध्यम से सरकार पर निशान साधा जा रहा है। लेकिन, इस वीडियो की सच्चाई कुछ और ही है।
खाना नहीं तो मेंढक खा रहे बच्चे
वायरल वीडियो में कुछ बच्चे मेंढकों को भूनकर खाते दिख रहे हैं। दावा कर रहे है कि उनके घर में अनाज का एक दाना भी नहीं हैं। इसलिए वे मजबूरी में मेंढक खाने को मजबूर हैं।
वीडियो के आधार पर कई मीडिया संस्थान ( पत्रिका नहीं ) खबरें भी प्रकाशित कर चुके हैं। जिसके बाद लोग बिहार राज्य सरकार पर आक्रोशित हो रहे हैं। वीडियो सामने आए के बाद स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया।
क्या है सच्चाई ?
सरकारी एजेंसी पीआईबी ( PIB Fact Check ) ने अपने फेक्ट चेक में इस खबर को झूठा करार दिया है। पीआईबी ने लिखा, दावा किया जा रहा है कि बिहार के जहानाबाद में बच्चे मेंढक खाने को मजबूर है, क्योंकि उनके घर में राशन नहीं है। जहानाबाद के डीएम से बातचीत के बाद पता चला कि यह वीडियो फर्जी है। उनके घर में पर्याप्त राशन उपलब्ध है।
निरीक्षण के लिए भेजी टीम
एक मीडिया संस्थान को दिए गए इंटरव्यू में जहानाबाद के डीएम नवीन कुमार ने बताया, वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन की एक टीम को मौके पर निरीक्षण के लिए भेजा गया।
जिसमें सामने आया कि उनके घर में पर्याप्त मात्रा में चावल, आटा, दाल इत्यादि खाद्यान्न सामग्री पहले से ही उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसी अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।