
नई दिल्ली : दुनियाभर में कोरोना वायरस (Coronavirus) ने तबाही मचा रखी है। ताजे आंकड़े के मुताबिक 4 करोड़ से अधिक लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। वहीं भारत में इसका प्रकोप और तेजी से बढ़ रहा है। स्वास्थ मंत्रालय के मुताबिक देश नें संक्रमण के मामले 76.51 लाख को पार कर चुके हैं, जबकि अब तक 1.15 लाख से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। हालांकि इस बीमारी के लिए कई वैक्सीन बनाए जा रहे हैं मगर अभी तक कोई पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ। इस बीच आईसीएमआर की चेतावनी दी है की कोरोना वायरस संक्रमण के री-इंफेक्शन के कई मामले सामने आ रहे हैं।
क्या होत है री-इंफेक्शन?
दरअसल, ज्यादातर लोगों का मानना है कि एक बार कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद उन्हे वायरस से कोई खतरा नहीं होता। ऐसे में लोग ई बार लापरवाही करने लगते हैं। लेकिन अब आईसीएम की चेतावनी दी है कोरोना से ठीक हुए शख्स को दोबारा से कोरोना संक्रमण हो सकता है। इसी को मेडिकल भाषा में री-इंफेक्शन भी कहा जाता है।
जानलेवा हो सकता है री-इंफेक्शन
आईसीएमआर के मुताबिक भारत में कई ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें एक बार ठीक होने के बाद भी लोग कोरोना के चपेट में आ जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अगर वायरस से ठीक होने वाले किसी व्यक्ति में पांच महीनों में एंटीबॉडी कम हो जाती है, तो उसे फिर से कोरोना वायरस से संक्रमित होने का खतरा होता है और दोबारा वाला संक्रमण जानलेवा भी हो सकता है।
कब होता है री-इंफेक्शन का खतरा?
आईसीएमआर के मुताबिक, री-इंफेक्शन के मामलों की पहचान करने में 90 से 100 दिन का समय लग सकता है। आईसीएमआर के निदेशक बलराम भार्गव बताते हैं कि एंटी बॉडी तीन महीने तक शरीर में रहता है लेकिन कई में यह पांच महीने तक में रहता है।
नहीं है इम्युनिटी की गारंटी
भार्गव के मुताबिक दूसरी बार संक्रमित होने पर कोरोना के मरीजों में अधिक गंभीर लक्षण महसूस हो सकते हैं और एक बार संक्रमित हो जाने के बाद इम्युनिटी को लेकर कोई गारंटी नहीं दी जा सकती। कई मामलों में तो ये जानलेवी भी हो सकते हैं।