
नई दिल्ली। ताइवान के रहने वाले एक दादा जी अपनी मोबाइल चलाने की लत के कारण इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। युआन का कहना है कि दो साल पहले उनके पोते ने उन्हें यह वीडियो गेम खेलना सिखाया था। अब बच्चों को तो डांट-डपट कर फिर भी सुधारा जा सकता है लेकिन बुजुर्गों को कोई कैसे समझाए? ताइवान के ये दादा जी अपनी वीडियो गेम खेलने की लत की वजह से इस वजह से चर्चा में हैं क्यों कि वे ऐसा अपनी बीमारी की वजह से करते हैं। आइए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला। मोबाइल फोन तो हर इंसान की जान बन चुका है। अगर किसी का फोन 5 मिनट के लिए भी उससे दूर हो जाए तो व्यक्ति का सुख-चैन सब खो जाता है। आमतौर पर युवा लोग ही स्मार्ट फोन ज्यादा इस्तेमाल किया करते हैं लेकिन इन दादा जी का केस थोड़ा अलग है।
ताइवान की राजधानी ताइपे में रहने वाले चेन सैन युआन जब भी घर से बाहर निकलते हैं, वह बकायदा अपने साथ एक या दो नहीं बल्कि 11 स्मार्टफोन्स लेकर निकलते हैं। खेल के प्रति इनकी दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि कई बार यह खेल के चक्कर में रातभर घर से बाहर रहते हैं और सुबह 4 बजे घर पहुंचते हैं। इन दादाजी का नाम हैं युआन जो स्मार्ट फोन के बिना एक मिनट भी नहीं रह पाते हैं। दरअसल, युआन को पोकेमॉन गो गेम खेलना बहुत पसंद हैं। आपको बता दें कि, पोकेमॉन गो गेम में खिलाड़ी को पोकेमॉन पकड़ने होते हैं। किसी को भी जानकर हैरानी होगी कि सबसे कि पोकेमॉन गो खेलने के शौक की वजह से महीने में 1,165 यूरो यानी करीब 92 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। अब तो युआन इस 11 की संख्या को जल्द ही 15 में बदलने की कोशिश में जुटे हुए हैं। दरअसल युआन इसलिए दिनभर दिनभर में पोकेमॉन गो गेम खेलते हैं ताकि वो फिर से अपनी पुरानी भूलने की बीमारी अलजाइमर का शिकार ना हो जाएं यह गेम इन्हें अलजाइमर का शिकार होने से बचाता है।