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हिंदुओं ने कर रखा था इन्हें समाज से बाहर, फिर मुसलमानों ने उठाया इतना बड़ा कदम कि नहीं होगा विश्वास

यह कहना गलत नहीं होगा कि आज ऐसा दौर आ गया है जब हिंदुओं और मुसलमानों के रिश्तों के बीच की दूरी को और बढ़ाया जा रहा है

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Priya Singh

Aug 10, 2018

muslim youths help hindu woman to perform last rites of son

हिंदुओं ने कर रखा था इन्हें समाज से बाहर, फिर मुसलमानों ने उठाया इतना बड़ा कदम कि नहीं होगा विश्वास

नई दिल्ली। यह कहना गलत नहीं होगा कि आज ऐसा दौर आ गया है जब हिंदुओं और मुसलमानों के रिश्तों के बीच की दूरी को और बढ़ाया जा रहा है और दोनों समुदायों को आपस में भिड़ाने के लिए आए दिन नफरत के बीज बोए जा रहे हैं लेकिन अगर इसी बीच इन दोनों समुदायों के बीच कोई मार्मिक और दिल को छू जाने वाली कोई खबर आए तो हर किसी को एक अलग सा सुकून मिलता है। ऐसी ही एक सुकून भरी खबर असम से आई है जहां एक महिला इसलिए अपने बेटे को अंतिम संस्कार नहीं कर पा रही थी क्योंकि गांव के लोगों ने उसका बहिष्कार कर रखा था। ऐसे में गंजा जमुनी तहजीब को जिंदा रखते हुए कुछ मुस्लिम युवाओं ने आगे बढ़कर ऐसा काम किया जो हर किसी को खुश कर जाएगा। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जमीन के विवाद के चलते ग्रामीणों ने गरीब महिला को समाज से बाहर कर रखा था। रिपोर्ट में महिला का नाम मोनोमति बताया गया है। मोनोमति के 35 साल के बेटे की अभी कुछ दिनों पहले उसकी मौत हो गई थी।

जानकारी के लिए बता दें कि, अपने बेटे का अंतिम संस्कार करना था लेकिन गांव का एक भी आदमी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मोनोमति के बेटे का नाम पबित्र बताया गोलाघाट जिले के बारकथानी मोलिगांव में मौत हो गई थी। मोनोमति और उसकी बहन ने रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों से अंतिम संस्कार में मदद की गुहार की लेकिन कोई भी मदद को आगे नहीं आया। स्थानीय अल्पसंख्यक नेता राजा अली, जिन्होंने पबित्र के अंतिम संस्कार के लिए अन्य युवाओं को बुलाया।

मोनोमति की मानें तो, उसने गांववालों से मदद की गुहार लगाई थी लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की इसके बाद पास के गांव के युवाओं का समूह आगे आया, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम थे। उन्होंने सब कुछ किया। उन्होंने मेरे बेटे के अंतिम संस्कार को पूरा करने में मदद दी मोनोमति का कहना है कि वो इन सब से ऐसे समय में मदद पाकर धन्य हो गई हैं। जानकारी के लिए बता दें कि, मृतक के धर्म और जाति को ध्यान में रखे बगैर ये लोग मदद के लिए आगे आए। वे कहते हैं कि वह संदेश देना चाहते हैं कि मृतक के अंतिम संस्कार से इनकार नहीं किया जा सकता। मुस्लिम युवाओं के इस कदम की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। मिली जानकारी के अनुसार, पबित्र का अंतिम संस्कार हिंदू रीती-रिवाज से किया गया है। बता दें की, जिन लोगों ने इस गरीब और बहिष्कृत परिवार की मदद की है उनका कहा है कि यह सब उन्होंने पब्लिसिटी ने नजरिए से नहीं किया है।