मोनोमति की मानें तो, उसने गांववालों से मदद की गुहार लगाई थी लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की इसके बाद पास के गांव के युवाओं का समूह आगे आया, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम थे। उन्होंने सब कुछ किया। उन्होंने मेरे बेटे के अंतिम संस्कार को पूरा करने में मदद दी मोनोमति का कहना है कि वो इन सब से ऐसे समय में मदद पाकर धन्य हो गई हैं। जानकारी के लिए बता दें कि, मृतक के धर्म और जाति को ध्यान में रखे बगैर ये लोग मदद के लिए आगे आए। वे कहते हैं कि वह संदेश देना चाहते हैं कि मृतक के अंतिम संस्कार से इनकार नहीं किया जा सकता। मुस्लिम युवाओं के इस कदम की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। मिली जानकारी के अनुसार, पबित्र का अंतिम संस्कार हिंदू रीती-रिवाज से किया गया है। बता दें की, जिन लोगों ने इस गरीब और बहिष्कृत परिवार की मदद की है उनका कहा है कि यह सब उन्होंने पब्लिसिटी ने नजरिए से नहीं किया है।