अध्ययन से पता चला कि 37 फीसदी भारतीय प्रतिभागियों ने इस बारे में कहा कि उनका खुद का बच्चा साइबर दादागिरी का शिकार हुआ है।
नई दिल्ली। ऐसे वक्त में जब पैरेंट्स ब्ल्यू ह्वेल के खतरों का सामना कर रहे हैं और अपने बच्चों को इससे बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं। जानकरी के लिए बता दें, भारत में साइबर दादागिरी को लेकर पिछले सात सालों में जागरूकता 10 फीसदी बढ़ी है, लेकिन अभी भी 37 फीसदी वयस्क इससे अनजान हैं। एक नए अध्ययन में यह जानकारी दी गई है। वहीं, दुनिया भर में 25 फीसदी वयस्क इससे अनजान है। मार्केट रिसर्च कंपनी इपसोस द्वारा मंगलवार को जारी 'ग्लोबल एडवाइजर साइबरबुलिंग स्टडी' में यह जानकारी दी गई है।
एक स्टडी में पता लगा है कि भारतीय छात्रों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दादागिरी का अधिक सामना करना पड़ता है, खास तौर पर अगर तुलना पश्चिमी देशों से करें तो। इपसोस पब्लिक अफेयर्स के कार्यकारी निदेशक पारिजात चक्रवर्ती ने कहा, "साइबर दादागिरी एक गंभीर मुद्दा है और बच्चा न केवल सोशल नेटवर्किं ग साइटों पर, बल्कि मोबाइल, ऑनलाइन मैसेजिंग, ईमेल, वेबसाइट्स, ऑनलाइन चैट रूम आदि पर भी पीड़ित हो सकता है।" इस अध्ययन से यह भी पता चला कि भारत में साल 2011 से ऐसे माता-पिताओं का प्रतिशत बढ़ गया है, जिन्होंने अपने बच्चे या अपने समुदाय के किसी बच्चे के साथ साइबर दादागिरी की घटना की जानकारी दी है।
वर्तमान अध्ययन में बताया गया है कि दो माता-पिताओं में से एक ने अपने समुदाय में ऐसे बच्चे की जानकारी दी, जिसे साइबर दादागिरी से पीड़ित किया गया है, जबकि साल 2011 में यह आंकड़ा 45 फीसदी था। अध्ययन से पता चला कि 37 फीसदी भारतीय प्रतिभागियों ने इस बारे में कहा कि उनका खुद का बच्चा साइबर दादागिरी का शिकार हुआ है। जबकि यह आंकड़ा 2011 में 32 फीसदी था।