क्या आपको पता है कि जिस शख्स ने भारत सहित पूरे विश्व के उत्थान के लिए इतना कुछ किया वह स्वयं तमाम बीमारियों से घिरे हुए थे।
नई दिल्ली। स्वामी विवेकानंद एक ऐसे महान दार्शनिक थे जिनकी न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में जयजयकार है। उनके विचार आज भी युवाओं का मार्गदर्शन करते हैं। अमरीका के शिकागो में दिए गए उनके भाषण का एक-एक शब्द आज भी गूंजता रहता है और इसकी प्रतिध्वनि युगों तक होती रहेगी लेकिन क्या आपको पता है कि जिस शख्स ने भारत सहित पूरे विश्व के उत्थान के लिए इतना कुछ किया वह स्वयं तमाम बीमारियों से घिरे हुए थे।
जी हां, मशहूर बंगाली लेखक मणि शंकर मुखर्जी की पुस्तक 'द मॉन्क एस मैन' में इस बात का वर्णन किया गया है। इस किताब में स्वामीजी की जिंदगी के तमाम अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है। साथ ही यह भी लिखा गया है कि निद्रा, यकृत, गुर्दे, मलेरिया, माइग्रेन, मधुमेह व दिल की बीमारी सहित 31 बीमारियों से ग्रस्त थे।
मणि शंकर के मुताबिक स्वामी जी के स्वास्थ्य में साल 1887 में काफी गिरावट हो गई थी। अधिक तनाव और भोजन की कमी के इसके प्रमुख कारणों में से एक था। उसी दौरान वह पित्त में पथरी और दस्त से भी पीड़ित हुए। हालांकि उनके निधन की वजह तीसरी बार दिल का दौरा पड़ना था।
शंकर ने इस बात का खुलासा किया था कि स्वामीजी को यह पहले से ही पता था कि 4 जुलाई को उनका देहांत हो जाएगा और शायद यही वजह रही होगी कि उन्होंने अपनी मिस्त्र यात्रा में कटौती की। उनका ऐसा कहना था कि अपनी जिंदगी के आखिरी पलों में वह अपने गुरूभाइयों के समीप रहना चाहते थे।
जिस दिन स्वामीजी ने अपने पार्थिव शरीर का त्याग दिया उस दिन उन्होंने अपने हाथों से सभी शिष्यों के पैर धोए। इस बात पर उनके शिष्यों ने उनसे इसका कारण जानना चाहा तो उनके इस सवाल पर स्वामीजी का जवाब था कि, 'भगवान यीशु ने भी अपने हाथों से शिष्यों के पैर धोए थे।' स्वामी जी के इस जवाब से शिष्यों को थोड़ा अजीब लगा क्योंकि इ्सामसीह ने जिस दिन ऐसा किया था वह उनकी जिंदगी का आखिरी दिन था।
उस दिन शिष्यों के पैर धोने के बाद स्वामी जी ने भोजन कर विश्राम करने लगे। करीब दोपहर डेढ़ बजे उन्होंने सभी को हॉल में बुलाया। लगभग तीन बजे तक संस्कृत ग्रंथ लघुसिद्धांत कौमुदी पर मनोरंजक शैली में पाठ पढ़ाया।
शाम के समय उन्होंने 3 घंटे तक योग किया। करीब 7 बजे अपने कक्ष में जाने से पहले उन्होंने अपने शिष्यों से कहा कि उन्हें कोई व्यवधान ना पहुंचाए। इसके बाद रात में 9 बजकर 10 मिनट पर उनकी मृत्यु की खबर पूरे बेलुड़ मठ में फैल गई। मात्र 39 वर्ष की उम्र में उन्होंने संसार का त्याग दिया।
मठकर्मियों का ऐसा मानना था कि स्वामी जी ने महासमाधि ली थी। हालांकि मेडिकल रिपोर्ट में कुछ और ही बात सामने आई। इसमें उनकी मौत की वजह दिमाग की नसें फटना बताई गई।