दुनिया के सबसे बड़े पक्षी के नाम को लेकर वैज्ञानिकों में दशकों से चला आ रहा मतभेद खत्म हो गया हैै।
नई दिल्ली: दुनिया के सबसे बड़े पक्षी के नाम को लेकर वैज्ञानिकों में दशकों से चला आ रहा मतभेद खत्म हो गया हैै। वैज्ञानिकों के मुताबिक, उन्होंने इस बहस पर विराम लगाते हुए यह टाइटल वोरोम्बे टाइटन को दिया है। तीन मीटर लंबा विलुप्त हो चुका यह पक्षी मैडागास्कन प्रजाति का था। बताया जाता है कि इसका वजन 800 किलोग्राम तक होता था।
यह अध्ययन रॉयल सोसाइटी ओपेन साइंस नाम की एक जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में मैडगास्कन जीवों में अप्रत्याशित विविधता के बारे में बताया गया है। बता दें, पहले यह माना गया था कि 'हाथी पक्षियों' की 15 विभिन्न प्रजातियों की पहचान दो वंशो के तहत की गई थी। वहीं, ब्रिटेन में प्रकाशित जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन (जेडएसएल) द्वारा हालिया शोध में इस तथ्य को मामले में नहीं दर्शाया गया है।
जेडएसएल के इंस्टीट्यूट ऑफ जूलॉजी के जेम्स हंसफोर्ड के मुताबिक, हाथी पक्षी मैडगास्कन के महाप्राणी से बड़े थे और द्वीप के विकासक्रमिक इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण विवादास्पद में से एक थे। इसकी वजह यह है कि विशाल शरीर वाले जानवर यदि शाकाहारी हों तो पौधों को खाकर पारिस्थितिक तंत्र पर गहरा असर डालते हैं। साथ ही वे मल के माध्यम से बायोमास और बीज फैलाते थे। इन विलुप्त हो चुके पक्षियों के प्रभाव के कारण मेडागास्कर आज भी प्रभावित है।
पक्षियों के इतिहास के इस रहस्यमय संसार को जानने के लिए शोधकर्ताओं ने शोध किया। दुनिया के सबसे विशाल पक्षी का नाम तय करने के लिए उन्होंने दुनिया भर के संग्रहालयों में मौजूद हाथी पक्षियों की हड्डियों की जांच की। इस जांच के आधार पर ही वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं। इस अध्ययन के दौरान उन्हें पता चला कि यह जीव तीन वंशों की चार विशेष प्रजातियों में फैला हुआ था। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन में इस परिवार के 80 से अधिक साल के वर्गीकरण को शामिल किया है। इसके आधार पर वोरोम्बे टाइटन को दुनिया का सबसे विशाल पक्षी घोषित करने पर सहमत हुए हैं।
वैज्ञानिकों की मानें तो इतिहास के सबसे विशाल पक्षी को निर्धारित करने के सफर में उन्हें अन्य बहुत से ऐतिहासिक तथ्य मिले हैं। इनमें हमें पता चला है कि किन कारणों से ये विलुप्त हुए। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज के कारण वर्तमान में विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुके पक्षियों को बचाने में मदद मिल सकती है।