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तो इस वजह से साधू-संत और बच्चों को मौत के बाद जलाया नहीं जाता, सच्चाई कर देगी हैरान

हिंदू धर्म में मौत के बाद आत्मा की शांति के लिए शव को जलाकर राख कर दिया जाता है, लेकिन बात अगर साधू-संतों या बच्चों की हो तो उनके मृत शरीर को दफना दिया जाता है।
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Jul 04, 2018
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तो इस वजह से साधू-संत और बच्चों को मौत के बाद जलाया नहीं जाता, सच्चाई है हैरान कर देने वाली

नई दिल्ली। मृत्यु जिंदगी का वह अहम सच है जिसे कोई नहीं टाल सकता है और न ही इससे कोई मुंह मोड़ सकता है। इस संसार में जिसने भी जन्म लिया है उसकी मृत्यु भी निश्चित है। जैसा कि हम जानते है कि मौत के बाद धर्म के अनुसार इंसान का क्रिया कर्म कर दिया जाता है। किसी में शव को दफना दिया जाता है तो कहीं उसे जलाने की प्रथा का पालन किया जाता है।

हिंदू धर्म में मौत के बाद आत्मा की शांति के लिए शव को जलाकर राख कर दिया जाता है। उसके बाद उस राख को नदी में विसर्जित कर दिया जाता है लेकिन बात अगर साधू-संतों या बच्चों की हो तो उनके मृत शरीरों का दाह संस्कार न करके उनको दफना दिया जाता है। क्या आपने कभी इस बात पर विचार किया है कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है? आज हम आपको इस बारे में बताते है कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि साधुओं और बच्चों का दाह संस्कार नहीं किया जाता है।

बता दें कि साधू-संतो द्वारा देह को त्यागने के बाद उनके शवों को दफनाने के पीछे की मान्यता यह है कि साधू-संत आम लोगों की अपेक्षा ईश्वर के ज्यादा करीब होते हैं। उनमें सर्वाधिक मानवीय गुण होते हैं।

शायद इसीलिए वह ईश्वरीय मार्ग पर आम लोगों से हमेशा आगे रहते हैं। समाज में वे अन्य सामान्य इंसानों की अपेक्षा ज्यादा पूजनीय होते हैं। इसीलिए उन्हें कमल के पुष्प की भांति बैठा कर दफना दिया जाता हैं।

अब बात अगर बच्चों की करें तो बच्चे भी फरिशतों तरह होते हैं। उनका मन शुद्ध होता है। उसमें किसी भी तरह का कोई सांसारिक छल-कपट नहीं पाया जाता है। साधूत की तरह बच्चे भी परम शुद्ध अवस्था में होते हैं। इसी वजह से बच्चों को भी दफना दिया जाता हैं।

Published on:
04 Jul 2018 12:46 pm