
बच्चों को सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और निरंतर सीखते रहने की प्रेरणा
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आंजणा पटेल समाज सेवा संघ, हुब्बल्ली-धारवाड़ के पूर्व अध्यक्ष एवं समाजसेवी दूदाराम चौधरी थोब ने कहा कि जीवन में गुरु का स्थान सर्वोच्च होता है। गुरु केवल ज्ञान नहीं देते, बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण भी करते हैं। उन्होंने बच्चों को सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और निरंतर सीखते रहने की प्रेरणा देते हुए कहा कि दिव्यांगता कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती, यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो। कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना से हुई।
उत्कृष्ट प्रस्तुति वाले विद्यार्थियों को विशेष उपहार
कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण तब आया, जब मूक-बधिर विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। छात्र प्रवीण, एल्लप्पा, राजू और समर्थ ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं, वहीं राजप्पा, बसप्पा, मनोज, सरनप्पा, बसवराज और मणिकंठन ने सामाजिक संदेश पर आधारित स्कीट प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया। उत्कृष्ट प्रस्तुति देने वाले सभी विद्यार्थियों को विशेष उपहार देकर सम्मानित किया गया। समारोह में विकास चौधरी, रोहित चौधरी, ममता चौधरी, कविता चौधरी, भूमिका चौधरी, रूशिका चौधरी सहित अन्य उपस्थित रहे।
चौधरी परिवार ने बच्चों को वितरित की स्टेशनरी सामग्री एवं मिष्ठान
संस्थान के संस्थापक एवं प्रबंध न्यासी रोबर्ट राफेल ने सांकेतिक भाषा (साइन लैंग्वेज) की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मूक-बधिर बच्चे अपनी सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान के कई विद्यार्थी आईटीआई में फीटर ट्रेड का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं। उन्होंने समाज से ऐसे बच्चों को मुख्यधारा से जोडऩे में सहयोग देने की अपील भी की। इस अवसर पर रोबर्ट राफेल तथा संस्थान की वार्डन मंजूला का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया गया।
राजस्थान पत्रिका के सामाजिक सरोकारों की जानकारी
प्रारम्भ में राजस्थान पत्रिका, हुब्बल्ली के संपादकीय प्रभारी अशोक सिंह राजपुरोहित ने राजस्थान पत्रिका के सामाजिक सरोकारों की जानकारी देते हुए कहा कि पत्रिका समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचकर सकारात्मक बदलाव लाने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल सामग्री वितरित करना नहीं, बल्कि बच्चों को यह विश्वास दिलाना है कि समाज उनके साथ खड़ा है और उनकी प्रतिभा का सम्मान करता है।