
राजेश्वर भगवान के जयकारों से गूंजा राजेश्वर भवन
संत राजेश्वर भगवान की पुण्यतिथि को आंजणा समाज के लिए धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक एकजुटता का अवसर भी है। आयोजन में श्रद्धालुओं ने उनके बताए मार्ग पर चलने और समाज में सेवा, सद्भाव तथा संस्कारों को मजबूत करने का संकल्प लिया। पुण्यतिथि के अवसर पर सुबह आरती के बाद भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ। जोधपुर से आई कुलदीप ओझा एंड पार्टी ने भजनों की प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भजनों पर झूमते और राजेश्वर भगवान के जयकारे लगाते नजर आए। दोपहर में महाप्रसादी और शाम को महाआरती का आयोजन किया गया।
राजस्थान की संस्कृति से जुड़ी रहीं महिलाएं
आयोजन में महिलाओं की विशेष भागीदारी रही। पारंपरिक राजस्थानी परिधान और श्रृंगार में पहुंचीं महिलाओं ने कार्यक्रम में राजस्थान की लोक संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। प्रवास में रहते हुए भी अपनी मातृभूमि की परम्पराओं और संस्कारों से जुड़ाव का यह दृश्य आयोजन का विशेष आकर्षण रहा।
परिवार सहित शामिल हुए समाजबंधु
संगठन की ओर से समाज के सभी बंधुओं को परिवार सहित कार्यक्रम में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया था। समाज के व्यापारियों एवं प्रतिष्ठान संचालकों से भी इस दिन अवकाश रखकर धार्मिक आयोजन में सहभागी बनने की अपील की गई थी। इसके चलते बड़ी संख्या में समाजबंधु कार्यक्रम में शामिल हुए।
राजेश्वर भगवान के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहे
आंजणा (पटेल) समाज सेवा संगठन हुब्बली-धारवाड के सचिव वगताराम पारलू ने बताया कि राजेश्वर भगवान की पुण्यतिथि के अवसर पर हर वर्ष धार्मिक आयोजन किया जाता है। इस बार भी हुब्बल्ली-धारवाड़ के साथ आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाजबंधु परिवार सहित शामिल हुए। उन्होंने कहा कि आयोजन का उद्देश्य समाज को धार्मिक एवं सांस्कृतिक परम्पराओं से जोड़े रखना और राजेश्वर भगवान के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
सेवा में आगे आए समाजबंधु
आयोजन को सफल बनाने में समाज के श्रद्धालुओं और दानदाताओं ने विभिन्न सेवाओं की जिम्मेदारी संभाली। श्रद्धालुओं ने राजेश्वर भगवान के दर्शन, पूजन और धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेकर पुण्यलाभ लिया। महाआरती के दौरान पूरा राजेश्वर भवन भगवान के जयकारों से गूंज उठा। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण की।
कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर आंजणा (पटेल) समाज सेवा संगठन हुब्बली-धारवाड़ के अध्यक्ष सोपाराम काग, दूदाराम कान्दली, खंगाराम कान्दली, केवलराम ठां, किशोर पटेल, मूलाराम कान्दली, तेजाराम मालवी सिनली, पीराराम मालवी, रूपाराम ठां, कानाराम खाखरलाई, चैनाराम काग, ओमाराम सीह, केवलराम ठां, मूलाराम, डूंगराराम काग, विरमराम पोण, जूंजाराम काग, टिकमाराम मालवी, छोगाराम काग, रमेश करड़, कलाराम करड़, हरजीराम, सांवलराम, स्वरूपराम धारवाड़, विरमराम करलू, सोमाराम हारणी, सोमाराम मालवी सिनली, रूगनाथ मालवी, शेराराम ठां, भीमाराम करड़, अणदाराम तरक, नेमाराम काटोतरिया, कृष्णकुमार, जगदीश धुणिया, समर्थराम कुकील, मोहनराम अराबा, केराराम, मकराराम, पीराराम ठां, ओमाराम, तेजाराम बोका, मालाराम सीह, जालाराम मालवी सिनली समेत समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। इसके साथ ही कालूसिंह चौहान, सुभाषसिंह जमादार, रमेश बाफना, अभिषेक मेहता, संदीप मेहता, परबतसिंह खींची, वेलाराम घांची, अनोप दर्जी, धर्मेन्द्र माली, उदाराम प्रजापत, घेवरराम पोण, भीमाराम पोण, भीमाराम देवासी, जोगाराम तरक, तरण पटेल चाली, चुन्नीलाल सोलंकी, कैलाश सोलंकी, ओमाराम काग, ताम्बाराम सीह समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।