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मिलावट पर निगरानी के लिए पर्याप्त अमला नहीं, कर्नाटक में आधे से ज्यादा खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद खाली

कर्नाटक में लोगों की थाली तक पहुंचने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा की निगरानी करने वाला तंत्र ही कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। राज्य में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के आधे से ज्यादा पद रिक्त हैं। ऐसे में खाद्य पदार्थों की जांच, प्रतिष्ठानों के निरीक्षण, नमूने लेने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का जिम्मा सीमित अधिकारियों पर आ गया है।
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वाल खाद्य पदार्थों की जांच का जिम्मा सीमित अधिकारियों पर

वाल खाद्य पदार्थों की जांच का जिम्मा सीमित अधिकारियों पर

113 पद खाली
खाद्य सुरक्षा अधिकारी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की जमीनी कड़ी हैं। होटल, रेस्टोरेंट, बेकरी, मिठाई की दुकान, मांस-मछली कारोबार, खाद्य निर्माण इकाइयों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में निरीक्षण से लेकर खाद्य पदार्थों के नमूने लेने तक की जिम्मेदारी इन्हीं अधिकारियों की होती है। अधिकारियों की कमी के कारण एक अधिकारी को बड़े क्षेत्र और बड़ी संख्या में प्रतिष्ठानों की निगरानी करनी पड़ रही है। कर्नाटक में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के लिए 210 पद स्वीकृत हैं। केवल 97 पद ही भरे है। 113 पद खाली है।

बढ़ रहा खाद्य कारोबार, घट रहा निगरानी तंत्र
कर्नाटक में शहरीकरण और खाद्य कारोबार के विस्तार के साथ होटल, रेस्टोरेंट, बेकरी, क्लाउड किचन और पैकेज्ड फूड कारोबार तेजी से बढ़ा है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी ने भी कारोबार का दायरा बढ़ाया है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग के सामने निगरानी का काम पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। विभाग को नियमित निरीक्षण के साथ शिकायतों की जांच, खाद्य नमूनों का संग्रह, प्रयोगशाला जांच और मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई करनी होती है। पर्याप्त अधिकारी नहीं होने पर इन सभी गतिविधियों का नियमित संचालन मुश्किल हो सकता है।

त्योहारों में बढ़ जाता है दबाव
त्योहारों के दौरान मिलावटी मिठाइयों, खाद्य तेल, दूध और दुग्ध उत्पादों, मसालों तथा अन्य खाद्य पदार्थों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाए जाते हैं। ऐसे अभियानों के दौरान विभाग पर अतिरिक्त दबाव रहता है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की कमी के कारण विभाग को प्राथमिकता के आधार पर प्रतिष्ठानों का चयन करना पड़ता है। इसका मतलब यह है कि हर खाद्य प्रतिष्ठान की नियमित जांच संभव नहीं हो पाती।

सिर्फ अधिकारी नहीं, जांच तंत्र भी जरूरी
खाद्य सुरक्षा व्यवस्था केवल निरीक्षण अधिकारियों तक सीमित नहीं है। अधिकारियों के साथ खाद्य नमूनों की वैज्ञानिक जांच के लिए पर्याप्त प्रयोगशाला क्षमता, तकनीकी कर्मचारी और समयबद्ध रिपोर्टिंग भी जरूरी है।
यदि किसी प्रतिष्ठान से लिया गया नमूना जांच के लिए भेजा जाता है, तो उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई होती है। इसलिए नमूना संग्रह से लेकर प्रयोगशाला जांच और कानूनी कार्रवाई तक पूरी श्रृंखला मजबूत होना जरूरी है।

उपभोक्ता की सुरक्षा सीधे प्रभावित
खाद्य पदार्थों में मिलावट या दूषित खाद्य सामग्री से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की संख्या केवल सरकारी कर्मचारियों की रिक्तियों का मामला नहीं है, बल्कि सीधे उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। राज्य में खाद्य कारोबार के लगातार विस्तार के बीच विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि सरकार खाली पदों को कितनी जल्दी भरती है और क्या केवल भर्ती के बजाय निरीक्षण एवं प्रयोगशाला ढांचे को भी समान रूप से मजबूत किया जाता है।