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कर्नाटक कैबिनेट में महिलाओं की एंट्री की तैयारी, उमाश्री समेत 3 नाम चर्चा में

कर्नाटक में हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद एक बार फिर फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार अब मंत्रिमंडल में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने की तैयारी में है। मौजूदा मंत्रिमंडल में एक भी महिला को जगह नहीं मिलने के बाद पार्टी के भीतर और बाहर सवाल उठ रहे हैं। इसी के बीच 2 से 3 महिला नेताओं को मंत्री बनाए जाने की चर्चा सामने आई है। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष और कुछ नेताओं की नाराजगी को देखते हुए भी नेतृत्व बदलाव पर विचार कर रहा है। शिवकुमार ने इस सिलसिले में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व से चर्चा की है। उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की।
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कर्नाटक कैबिनेट में संभावित फेरबदल के बीच चर्चा में आए महिला नेताओं के नाम—संदूर विधायक ई. अन्नपूर्णा, गुलबर्गा उत्तर विधायक कनीज फातिमा और विधान परिषद सदस्य उमाश्री।

कर्नाटक कैबिनेट में संभावित फेरबदल के बीच चर्चा में आए महिला नेताओं के नाम—संदूर विधायक ई. अन्नपूर्णा, गुलबर्गा उत्तर विधायक कनीज फातिमा और विधान परिषद सदस्य उमाश्री।

इन महिला नेताओं के नाम चर्चा में
संभावित महिला मंत्रियों के तौर पर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य उमाश्री, संदूर की विधायक ई. अन्नपूर्णा तथा गुलबर्गा उत्तर की विधायक कनीज फातिमा के नाम चर्चा में हैं। उमाश्री पहले भी कर्नाटक सरकार में मंत्री रह चुकी हैं। वह महिला एवं बाल विकास तथा कन्नड़ एवं संस्कृति विभाग संभाल चुकी हैं। ई. अन्नपूर्णा संदूर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं, जबकि कनीज फातिमा गुलबर्गा उत्तर सीट से विधायक हैं। कनीज फातिमा को अल्पसंख्यक समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख महिला नेताओं में माना जाता है।

एक पद खाली, जरूरत पड़ी तो मौजूदा मंत्री हटेंगे
कर्नाटक में मंत्रियों की अधिकतम संख्या मुख्यमंत्री समेत 34 हो सकती है। हालिया विस्तार के बाद मंत्रिमंडल लगभग पूरी क्षमता तक पहुंच गया है। ऐसे में यदि दो या तीन महिलाओं को मंत्री बनाया जाता है तो कुछ मौजूदा मंत्रियों को हटाने या विभागों में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। कांग्रेस नेतृत्व के सामने क्षेत्रीय, जातीय और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के साथ महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की चुनौती है। हालिया मंत्रिमंडल विस्तार में कई नए चेहरों को जगह दी गई थी, लेकिन महिलाओं को प्रतिनिधित्व नहीं मिलने से पार्टी की आलोचना हुई।

मानसून सत्र के कारण फिलहाल टला फैसला
कांग्रेस आलाकमान ने फिलहाल मंत्रिमंडल में प्रस्तावित छोटे फेरबदल को टाल दिया है। कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 13 अगस्त से शुरू होने वाला है। कम समय को देखते हुए पार्टी ने अब मंत्रिमंडल में बदलाव का फैसला सत्र समाप्त होने के बाद लेने का संकेत दिया है।

महिला प्रतिनिधित्व बना राजनीतिक मुद्दा
डीके शिवकुमार के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से ही मंत्रिमंडल में महिलाओं की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कांग्रेस के पास राज्य विधानसभा में महिला विधायक हैं, लेकिन मंत्रिमंडल में उन्हें जगह नहीं मिलने से विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का मौका मिला है।

आलाकमान की मंजूरी के बाद तस्वीर होगी साफ
ऐसे में संभावित फेरबदल को केवल मंत्रियों के बदलाव के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे कांग्रेस की राजनीतिक छवि और आंतरिक संतुलन से भी जोड़कर देखा जा रहा है। महिलाओं को मंत्री पद देने से पार्टी एक साथ कई राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर सकती है। महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के साथ क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण भी साधे जा सकते हैं। हालांकि, अभी तक महिला मंत्रियों के नाम और संख्या पर अंतिम आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। कांग्रेस आलाकमान की मंजूरी के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।