
राजगुरु ब्रांड को मजबूत पहचान दिलाई
कांतिलाल पुरोहित वर्ष 1994 से हुब्बल्ली में निवास कर रहे हैं। इससे पहले उनका परिवार हावेरी जिले की हानगल तहसील के बोमनहल्ली में रहता था। उनके पिता मंगल सिंह पुरोहित करीब 18 वर्ष की आयु में रोजगार की तलाश में राजस्थान से कर्नाटक आए थे। शुरुआती दिनों में उन्होंने एक कपड़े की दुकान पर काम किया। कुछ वर्षों तक नौकरी करने के बाद उन्होंने स्वयं की कपड़े की दुकान शुरू की। परिवार की मेहनत, ईमानदारी और संघर्ष ने आगे चलकर एक मजबूत व्यावसायिक नींव तैयार की। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 1994 में हुब्बल्ली के कबसुद गली क्षेत्र में मात्र 10 गुणा 10 फीट की छोटी-सी दुकान में राजगुरु पेन मार्ट की शुरुआत की गई। ग्राहकों के विश्वास और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के कारण यह छोटा कारोबार लगातार विस्तार करता गया। वर्ष 2000 में राजगुरु पेपर तथा राजगुरु बुक मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत हुई। इसके बाद वर्ष 2005 में राजगुरु एजेंसी और वर्ष 2016 में राजगुरु एसोसिएट की स्थापना की गई। आज राजगुरु ग्रुप की पांच फर्में ट्रेडिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में सक्रिय हैं। राजगुरु ग्रुप के राजगुरु ब्रांड के तहत नोटबुक, स्टेशनरी तथा स्कूलों और कार्यालयों में उपयोग होने वाली विभिन्न सामग्री तैयार की जाती है। समूह के उत्पाद केवल उत्तर कर्नाटक तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि गोवा, कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों तथा दक्षिण महाराष्ट्र के कई जिलों तक नियमित रूप से पहुंचाए जाते हैं। गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति और ग्राहकों के विश्वास ने राजगुरु ब्रांड को मजबूत पहचान दिलाई है।
सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय
व्यवसाय के साथ समाजसेवा को भी कांतिलाल पुरोहित ने अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाया है। वे पिछले 12 वर्षों से विराट फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं। संस्था वृद्धाश्रमों में स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने, जरूरतमंदों को आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने, गरीब बच्चों की सहायता करने तथा विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाती है। इसके अलावा वे सनातन सेवा संगठन चैरिटेबल ट्रस्ट की एडवाइजरी कमेटी के सदस्य हैं। वे राजपुरोहित समाज शिक्षा निधि समर्पण योजना, बाबा रामदेव मरुधर सेवा संघ, हुब्बल्ली, निम्बेश्वर गौशाला (ओडवाड़ा) तथा पथमेड़ा गौशाला सहित कई सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। वे राजपुरोहित समाज, हुब्बल्ली के संयुक्त सचिव का दायित्व भी निभा चुके हैं।
गौसेवा प्रकल्पों में सहयोग
धार्मिक एवं शैक्षणिक क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। राजगुरु परिवार ने आसोतरा ब्रह्मधाम में निर्मित धर्मशाला के लिए एक कक्ष का सहयोग दिया है। जालोर स्थित राजपुरोहित छात्रावास में भी एक कक्ष का निर्माण करवाया गया है। घाणा (आहोर) गौशाला सहित विभिन्न गौसेवा प्रकल्पों में भी परिवार लगातार सहयोग करता रहा है। वेदांताचार्य डॉ. ध्यानाराम महाराज के निर्देशन में संचालित विभिन्न गुरुकुलों के विद्यार्थियों के लिए पिछले लगभग छह वर्षों से विशेष डिजाइन की निशुल्क नोटबुकें उपलब्ध करवाई जा रही हैं। आवश्यकता पडऩे पर यह सेवा निरंतर जारी रहती है। इसके अलावा हुब्बल्ली के कुष्ठ (लेप्रोसी) अस्पताल में समय-समय पर भोजन वितरण भी राजगुरु परिवार की ओर से किया जाता है।
वाणिज्य रत्न सम्मान
कांतिलाल पुरोहित को हाल ही में कर्नाटक चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा वाणिज्य रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। व्यापार क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों, रोजगार सृजन तथा सामाजिक योगदान के लिए उन्हें शॉल, स्मृति चिह्न और सम्मान-पत्र प्रदान किया गया। राजगुरु परिवार धार्मिक परंपराओं के निर्वहन में भी अग्रणी रहा है। पिछले लगभग पांच दशकों से प्रत्येक भाद्रवा सुद एकम पर बाबा रामदेव के भव्य जागरण का आयोजन किया जाता है, जिसमें भजन कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देते हैं और श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी की व्यवस्था की जाती है। इसी प्रकार प्रत्येक पूर्णिमा पर परिवार में भगवान सत्यनारायण की कथा का आयोजन भी करीब पांच दशक से निरंतर किया जा रहा है।
कर्मभूमि में मिली पहचान
कांतिलाल एम. पुरोहित का मानना है कि व्यक्ति की वास्तविक सफलता केवल आर्थिक उपलब्धियों से नहीं मापी जाती, बल्कि इस बात से तय होती है कि उसने समाज, शिक्षा, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के लिए कितना योगदान दिया। राजस्थान की मिट्टी से मिले संस्कारों और कर्नाटक की कर्मभूमि में मिली पहचान ने उन्हें आज उन प्रवासी राजस्थानियों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा कर दिया है, जिन्होंने अपने परिश्रम से न केवल व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया, बल्कि सेवा और संस्कारों की मिसाल भी कायम की।