
पान की खेती
निगाहें श्रावण मास पर टिकी
ऐसे में अब किसानों की निगाहें श्रावण मास पर टिकी हैं, जब धार्मिक आयोजनों और पूजा-पाठ के कारण पान की मांग बढऩे के साथ कीमतों में सुधार की उम्मीद रहती है। दावणगेरे जिले में करीब 430 हेक्टेयर क्षेत्र में पान की खेती की जाती है। यहां उत्पादित पान की आपूर्ति राज्य के विभिन्न जिलों के अलावा महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के बाजारों में भी होती है।
सैकड़ों परिवारों की आजीविका पान की खेती पर
जिले के सैकड़ों परिवारों की आजीविका प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पान की खेती पर निर्भर है। किसानों का कहना है कि पान की खेती काफी श्रमसाध्य और खर्चीली होती है। बेलों की देखभाल, सिंचाई, उर्वरक, कीटनाशक और मजदूरी पर लगातार खर्च बढ़ रहा है, लेकिन बाजार में पत्तों के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। कई किसानों का कहना है कि मौजूदा कीमतों में उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। मजबूरी में कुछ किसान बेहतर भाव मिलने की उम्मीद में पान की बिक्री रोककर इंतजार कर रहे हैं।
मानसून के दौरान मांग में कमी
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान मांग में कमी और बाजार में आपूर्ति अधिक होने से कीमतों पर दबाव बना है। हालांकि श्रावण मास शुरू होने के बाद मंदिरों, धार्मिक अनुष्ठानों और सामाजिक आयोजनों में पान की खपत बढऩे से बाजार में तेजी आने की संभावना है। किसानों ने सरकार से बाजार हस्तक्षेप कर उचित मूल्य सुनिश्चित करने, विपणन व्यवस्था मजबूत करने तथा संकटग्रस्त पान उत्पादकों के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले समय में कई किसान पान की खेती छोडऩे को मजबूर हो सकते हैं।
Updated on:
02 Aug 2026 09:19 pm
Published on:
02 Aug 2026 09:16 pm
