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सरकार के निर्देश पर अड़ा एचडीएमसी, जल परियोजना में अंशदान रोकने का फैसला

राज्य सरकार द्वारा 24 घंटे पेयजल आपूर्ति परियोजना में नगर निगम का हिस्सा जमा करने के निर्देश के बावजूद हुब्बल्ली-धारवाड़ नगर निगम (एचडीएमसी) ने अपने रुख पर कायम रहते हुए नई पाइपलाइन बिछाने के लिए एनएमपीसी (नॉन-मिलियन प्लस सिटी) अनुदान का उपयोग करने का निर्णय लिया है। निगम की सामान्य सभा में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच तीखी बहस हुई। महापौर दुर्गम्मा बिजवाड़ की अध्यक्षता में हुई बैठक में अमिनभावी जल शोधन संयंत्र से धारवाड़ शहर तक नई पाइपलाइन बिछाने के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया। इसके लिए एनएमपीसी के तहत उपलब्ध अनुदान राशि का उपयोग किया जाएगा।
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एचडीएमसी सामान्य सभा में जलापूर्ति परियोजना को लेकर पार्षदों के बीच हुई तीखी बहस।

एचडीएमसी सामान्य सभा में जलापूर्ति परियोजना को लेकर पार्षदों के बीच हुई तीखी बहस।

24घंटे जलापूर्ति परियोजना
राज्य सरकार ने एचडीएमसी को निर्देश दिया था कि वह 24घंटे जलापूर्ति परियोजना में अपना लगभग 31.79 करोड़ रुपए का हिस्सा जमा करे। भाजपा पार्षदों ने इस निर्देश पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इससे नगर निगम की स्वायत्तता प्रभावित होगी। नगर आयुक्त रुद्रेश घाली ने सदन को बताया कि सरकार के पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि यदि निगम ने अपना अंशदान जमा नहीं किया तो प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है तथा अनुदान जारी करने पर भी असर पड़ सकता है। अधिकारियों के अनुसार लगभग 1,229.72 करोड़ रुपए की इस परियोजना (संचालन व रखरखाव लागत सहित) में एचडीएमसी का हिस्सा करीब 336.60 करोड़ रुपए है। अब तक निगम लगभग 129.61 करोड़ रुपए जमा कर चुका है, जबकि लगभग 206.99 करोड़ रुपए अभी बकाया हैं।

भाजपा पार्षदों ने सरकार पर लगाए आरोप
भाजपा पार्षद टिप्पण्णा मज्जिगी ने कहा कि यदि सरकार हर निर्णय स्वयं करेगी तो निगम की भूमिका समाप्त हो जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने एचडीएमसी के बकाया अनुदान रोक रखे हैं और वेतन अनुदान में भी कटौती की गई है। कुछ पार्षदों ने सुझाव दिया कि सरकार पहले निगम को लंबित अनुदान जारी करे और उसके बाद ही योगदान राशि की मांग करे।

परियोजना की प्रगति पर भी उठे सवाल
कई पार्षदों ने कहा कि पांच वर्ष की निर्धारित अवधि बीतने के बावजूद 24 घंटे जलापूर्ति परियोजना पूरी नहीं हुई है और अनेक क्षेत्रों में जलापूर्ति संतोषजनक नहीं है। सड़कों की खुदाई के बाद समय पर पुनस्र्थापना न होने का मुद्दा भी जोरदार ढंग से उठाया गया। केयूआईडीएफसी के अधीक्षण अभियंता सविता काट्टिगेनवर ने स्पष्ट किया कि स्थायी सड़क मरम्मत पाइपलाइन कार्य पूरी तरह समाप्त होने के बाद ही संभव है; फिलहाल अस्थायी मरम्मत की जा रही है।