
बाजार नहीं मिला तो खुद ग्राहक बनाए
शुरुआती दौर में महेश ताजा मशरूम लेकर बाइक से करीब 80 किलोमीटर तक जाते थे। कई लोग मशरूम खरीदने से झिझकते थे। उन्होंने ग्राहकों को इसके पोषण संबंधी फायदे बताए, अलग-अलग जगह स्टॉल लगाए और सरकारी प्रदर्शनियों में बिक्री शुरू की। धीरे-धीरे मांग बढ़ी और सोशल मीडिया के जरिए कर्नाटक के दूसरे हिस्सों से भी ऑर्डर मिलने लगे।
मशरूम से 20 उत्पाद, बढ़ी कमाई
2024 में महेश ने मशरूम प्रसंस्करण शुरू किया। अब पाउडर, कुकीज, पापड़, चिप्स और अचार सहित करीब 20 उत्पाद बनाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि प्रसंस्करण से मशरूम की शेल्फ लाइफ बढ़ती है और फसल बाद होने वाला नुकसान कम होता है। मशरूम पाउडर बनाने की शुरुआत उन्होंने अपनी मां के लिए प्रयोग के तौर पर की थी।
3 हजार लोगों को प्रशिक्षण
2023 से महेश मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। अब तक करीब 3,000 लोग प्रशिक्षण ले चुके हैं, जिनमें लगभग 30 फीसदी ने अपनी इकाइयां शुरू कर ली हैं। कुछ किसान महेश की प्रसंस्करण इकाई को मशरूम की आपूर्ति करते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्यम और रोजगार के अवसर बने हैं।
30 हजार से शुरू हो सकता है कारोबार
महेश के अनुसार, शेड पहले से हो तो करीब 30 हजार रुपए में मशरूम उत्पादन शुरू किया जा सकता है। ऑयस्टर, मिल्की और बटन मशरूम व्यावसायिक उत्पादन के लिए उपयोगी हैं। वे किसानों को उत्पादन शुरू करने से पहले बाजार और बिक्री की व्यवस्था तय करने की सलाह देते हैं। कृषि विभाग की नव उद्यम योजना के तहत मशरूम आधारित उत्पादों के लिए वित्तीय सहायता पाने वाले महेश कर्नाटक के पहले उद्यमी बने हैं।