
संस्कारशाला के वरिष्ठ सदस्य राजेश रावल ने शिविर का संयोजन करते हुए बच्चों को धर्म-अध्यात्म के साथ गीता, रामायण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों की जानकारी दी। उन्होंने मंत्रों के सही उच्चारण का अभ्यास कराया और बच्चों से उनका दोहराव करवाया। उन्होंने कहा कि संस्कार ही व्यक्ति के चरित्र और व्यक्तित्व की वास्तविक पहचान होते हैं। श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों के माध्यम से बच्चों को कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन, माता-पिता व गुरुजनों के सम्मान तथा सदाचारी जीवन का महत्व समझाया।
श्री सनातन धर्म चैरिटेबल ट्रस्ट के कार्यकारिणी सदस्य बाबूलाल सीरवी कराड़ी ने बच्चों को भारतीय परंपराओं और सामाजिक रीति-रिवाजों की जानकारी दी। उन्होंने महापुरुषों के जीवन प्रसंग सुनाकर उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने और जीवन में अच्छे संस्कार अपनाने का आह्वान किया। सामाजिक कार्यकर्ता सोमाराम मालवी पटेल सिणली ने अच्छी आदतों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करने, नियमित प्रणाम करने तथा बड़ों के प्रति आदर रखने की सीख दी।
शिविर में बच्चों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और सामूहिक गान की प्रस्तुति दी। धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में बच्चों ने उत्साह से भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में बच्चों ने श्रेष्ठ संस्कारों को जीवन में अपनाने, माता-पिता व गुरुजनों का सम्मान करने तथा अनुशासित जीवन जीने का संकल्प लिया।