हुबली

स्लीपर वंदे भारत के जल्द चलने के आसार, बेंगलूरु और मुंबई के बीच प्रीमियम रात्रिकालीन सेवा के लिए इस्तेमाल किया जाएगा

दक्षिण पश्चिम रेलवे ने दो वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट कमीशन कर दिए हैं। इन्हें बेंगलूरु और मुंबई के बीच प्रीमियम रात्रिकालीन सेवा के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार ट्रेन के संचालन और समय-सारणी को जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा। दोनों ट्रेनसेट बेंगलूरु में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड ने चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री के तहत तैयार किए हैं।
2 min read
स्लीपर वंदे भारत
स्लीपर वंदे भारत

जल्द ट्रायल रन
परीक्षण और निरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन्हें कमीशन किया गया है। प्रस्तावित मार्ग पर जल्द ट्रायल रन किया जाएगा। इससे यात्रा समय का आकलन करने के साथ आरडीएसओ के स्पीड ट्रायल की प्रक्रिया भी पूरी की जा सकेगी। रेलवे के अनुसार ट्रेन के केएसआर बेंगलूरु से सीएसएमटी मुंबई के बीच चलने की संभावना है। वहीं, एसएमवीटी बेंगलूरु से सेवा शुरू करने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है। दोनों विकल्पों पर मंथन जारी है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे। इनमें 11 एसी-3, चार एसी-2 और एक एसी-1 कोच शामिल होंगे। एसी-3 का किराया करीब 3,000 रुपए रहने का अनुमान है, जिसमें ऑन-बोर्ड भोजन भी शामिल होगा। अधिकारियों का मानना है कि यह किराया विमान के किराए की तुलना में काफी कम होगा। प्राथमिक स्तर पर ट्रेनसेट का रखरखाव केएसआर बेंगलूरु या एसएमवीटी बेंगलूरु में किया जाएगा।

हुब्बल्ली होकर चलाने की मांग
ट्रेन दोनों शहरों से रात में रवाना होकर करीब 16 घंटे में गंतव्य तक पहुंचने की उम्मीद है। ट्रेन को कल्याण कर्नाटक के रास्ते चलाने की योजना से रायचूर, यादगीर और कलबुर्गी जैसे जिलों को बड़े शहरों से तेज रेल संपर्क मिलने की उम्मीद है। यह मार्ग करीब 1,137 किलोमीटर लंबा है और अधिकांश हिस्से में विद्युतीकरण व दोहरीकरण हो चुका है। कुछ हिस्सों में अधिकतम गति 130 किमी प्रति घंटे तक है। फिलहाल इस मार्ग पर उदय एक्सप्रेस और एसएमवीटी बेंगलूरु-एलटीटी मुंबई एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें चलती हैं, लेकिन यात्रा में करीब 24 घंटे लगते हैं। ऐसे में स्लीपर वंदे भारत से यात्रा समय में बड़ा अंतर आने की उम्मीद है। जनप्रतिनिधियों और रेलवे यात्रियों ने ने वंदे भारत स्लीपर को हुब्बल्ली होकर चलाने की मांग की थी। हालांकि, करीब 1,216 किलोमीटर के अपेक्षाकृत लंबे मार्ग और कुछ हिस्सों में गति संबंधी सीमाओं को देखते हुए फिलहाल इस विकल्प पर विचार नहीं किया गया है।

Updated on:
10 Aug 2026 06:10 pm
Published on:
10 Aug 2026 05:35 pm