हुबली

आस्था, संस्कार और सेवा का संगम: ढाई दशक से धर्म और समाजसेवा की मिसाल बना वासुपूज्य जैन श्वेताम्बर ट्रस्ट

प्रवासी जैन समाज की आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का प्रमुख केंद्र बने वासुपूज्य जैन श्वेताम्बर ट्रस्ट हुब्बल्ली ने पिछले ढाई दशक में धार्मिक गतिविधियों के साथ सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। हुब्बल्ली के केशवापुर इलाके में संचालित ट्रस्ट मंदिर, धार्मिक शिक्षा, संस्कार निर्माण और सेवा कार्यों के माध्यम से समाज को एक सूत्र में बांधने का निरंतर प्रयास कर रहा है। हाल ही में ट्रस्ट की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है, जिसका कार्यकाल तीन वर्ष का रहेगा।
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वासुपूज्य जैन श्वेताम्बर ट्रस्ट की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी।
वासुपूज्य जैन श्वेताम्बर ट्रस्ट की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी।

नई कार्यकारिणी को मिली तीन वर्षों की जिम्मेदारी
नई कार्यकारिणी में शांतिलाल पोरवाल बरलूट को अध्यक्ष, भगवानचंद पी. भंडारी पाली को उपाध्यक्ष, अशोककुमार आर. जैन बरलूट को कार्यदर्शी, राजमल के. राठौड़ बिजोवा को सह कार्यदर्शी तथा महेंद्रकुमार जैन पाडीव को कोषाध्यक्ष चुना गया है। ट्रस्टी के रूप में इंदरमल टी. चौहान वेदाना, अशोककुमार एस. भंडारी पाली, धनराज एस. भंडारी पाली, निर्मलकुमार पी. भंडारी पाली, मानवकुमार पी. संघवी मंडवारिया, गिरीशकुमार बरलूट, प्रकाश पी. कोठारी घाणेराव, महेंद्रकुमार एस. चौहान दांतराई, प्रवीण बी. बागरेचा सिवाना और प्रवीण एल. चौधरी सिवाना दायित्व निभाएंगे।

मंदिर के साथ संस्कार और शिक्षा का केंद्र
ट्रस्ट के अंतर्गत वासुपूज्य जिनालय के साथ वासुपूज्य आराधना भवन, वासुपूज्य नूतन भवन, जैन धार्मिक पाठशाला तथा संस्कार वाटिका का संचालन किया जाता है। प्रत्येक रविवार सुबह संस्कार वाटिका में बच्चों और युवाओं को नैतिक एवं धार्मिक संस्कार दिए जाते हैं। वहीं प्रतिदिन शाम 7 से 9 बजे तक धार्मिक पाठशाला में पांच वर्ष से अधिक आयु के बच्चों एवं श्रद्धालुओं को जैन धर्म की शिक्षा प्रदान की जाती है।

आयंबिल खाता और भोजनशाला से सेवा का विस्तार
नूतन भवन में पिछले करीब आठ वर्षों से आयंबिल खाता तथा चार वर्षों से भोजनशाला का नियमित संचालन हो रहा है। इन व्यवस्थाओं का लाभ समाज के अनेक परिवारों और श्रद्धालुओं को मिलता है। ट्रस्ट समय-समय पर विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और सेवा गतिविधियों का आयोजन भी करता है।

चातुर्मास और पर्युषण बने आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र
ट्रस्ट के तत्वावधान में अब तक लगभग दस चातुर्मास संपन्न हो चुके हैं। इनमें आचार्य अजीत शेखर सूरीश्वर, आचार्य नवरत्न सूरीश्वर, पन्यास प्रवर रत्नाचल विजय तथा पन्यास परमयशविजय सहित अनेक संतों का सान्निध्य समाज को प्राप्त हुआ। वर्तमान में गुरु समर्पण चातुर्मास-2026 के अंतर्गत साध्वी दक्षज्योतिश्री आदि ठाणा-4 का सान्निध्य प्राप्त हो रहा है। चातुर्मास के दौरान पर्युषण पर्व सहित अनेक धार्मिक आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न होते हैं।

25 वर्षों का गौरवशाली सफर
करीब 25 वर्ष पहले निर्मित वासुपूज्य जिनालय आज प्रवासी जैन समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र है। सरकारी भूमि के आवंटन से लेकर मंदिर निर्माण तक का सफर आसान नहीं था, लेकिन समाज के सामूहिक प्रयासों से यह सपना साकार हुआ। भूमि आवंटन की प्रक्रिया में शेषमल भंडारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मंदिर निर्माण में खोमीबाई टेकचंद भंडारी परिवार सहित समाज के अनेक परिवारों ने तन, मन और धन से सहयोग दिया। मूलनायक भगवान वासुपूज्य स्वामी एवं अन्य जिनप्रतिमाओं की प्रतिष्ठा 7 दिसंबर 2000 को संपन्न हुई। वर्ष 2025 में ट्रस्ट ने जिनालय की रजत जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर इस आध्यात्मिक धरोहर के 25 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया।

Updated on:
30 Jul 2026 08:22 pm
Published on:
30 Jul 2026 08:17 pm
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