
सदाचारपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रार्थना एवं मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ धार्मिक, सांस्कृतिक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियों में भाग लिया। संस्कारशाला के संस्थापक सदस्य बालकृष्ण सराफ ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कार ही व्यक्ति के चरित्र और व्यक्तित्व की वास्तविक पहचान होते हैं। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता का एक प्रसिद्ध श्लोक का उल्लेख करते हुए बच्चों को निष्ठापूर्वक कर्तव्य पालन, अनुशासन, माता-पिता एवं गुरुजनों के सम्मान तथा सदाचारपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा दी।
भारतीय परंपराओं एवं सामाजिक रीति-रिवाजों की जानकारी
सराफ ने प्रेरक प्रसंगों, भारतीय परंपराओं, सामाजिक रीति-रिवाजों एवं पर्व-त्योहारों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बचपन में प्राप्त संस्कार ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। साथ ही महापुरुषों के जीवन प्रसंगों के माध्यम से बच्चों को आदर्श जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। सत्र के दौरान बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में धर्म, संस्कृति, इतिहास, महापुरुषों एवं राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े प्रश्न पूछे गए। बच्चों ने पूरे उत्साह एवं आत्मविश्वास के साथ उत्तर दिए। विजेता प्रतिभागियों का सम्मान करते हुए सभी बच्चों को निरंतर अध्ययन, जिज्ञासा और ज्ञानार्जन के लिए प्रेरित किया गया।
सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ
कार्यक्रम में बच्चों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ किया तथा भक्ति और राष्ट्रभाव से ओतप्रोत जयघोष किए। पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण छा गया। अंत में उपस्थित सभी बच्चों ने श्रेष्ठ संस्कारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर संस्कारशाला के सदस्य राजेश रावल सहित अभिभावक एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।