
हुब्बल्ली। धारवाड़ के भाजपा नेता योगेश गौड़ा गौडर हत्याकांड में पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी को कर्नाटक हाईकोर्ट की खंडपीठ से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें जमानत प्रदान करते हुए उनकी आजीवन कारावास की सजा पर भी अंतरिम रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है। एक ओर मृतक के भाई गुरुनाथ गौड़ा ने कहा है कि वे इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। वहीं योगेश गौड़ा की पत्नी मल्लम्मा ने स्पष्ट कर दिया कि वह इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय नहीं जाएंगी।
हुब्बल्ली में पत्रकारों से बातचीत में मल्लम्मा ने कहा कि वह किसी का समर्थन नहीं कर रही हैं और खेती-किसानी कर अपना जीवनयापन कर रही हैं। उनके बारे में कई तरह की बातें कही गईं और उन पर पैसे लेने के आरोप भी लगाए गए, लेकिन ये सभी आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर अच्छे कर्म करने वालों के साथ अच्छा और बुरा करने वालों के साथ बुरा करता है। लोगों ने कहा कि मैंने पैसे लिए हैं, लेकिन यदि ऐसा होता तो मुझे दिन-रात मेहनत कर जीवन नहीं चलाना पड़ता।
मल्लम्मा ने दोहराया कि वह किसी भी परिस्थिति में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटाएंगी। उनका आरोप था कि गुरुनाथ गौड़ा और बसवराज कोरवर ने पार्टी से धन लिया है, इसलिए वे आगे कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया। उधर, गुरुनाथ गौड़ा ने कहा कि परिवार न्याय की लड़ाई जारी रखेगा और हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा का विषय बन गया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की जाती है।
हाल ही में बंगलूरू की विशेष अदालत ने भाजपा नेता योगेश गौड़ा हत्याकांड में पूर्व मंत्री विनय कुलकर्णी समेत 17 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए कुलकर्णी ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। यह मामला 15 जून 2016 का है, जब धारवाड़ शहर के एक जिम में योगेश गौड़ा पर कुछ हमलावरों ने हमला कर उनकी हत्या कर दी थी। हमलावरों ने धारदार हथियारों से वार कर वारदात को अंजाम दिया था। बताया जाता है कि योगेश गौड़ा और विनय कुलकर्णी के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा थी और इसी को लेकर दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था।