
Danam Nagender Disqualification: तेलंगाना में खैरताबाद विधानसभा सीट से विधायक दानम नागेंद्र की अयोग्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (KTR) ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कांग्रेस नेतृत्व के लिए ‘सुप्रीम थप्पड़’ बताया और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तथा तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पर निशाना साधा।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को नागेंद्र की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें दल-बदल विरोधी कानून के तहत विधायक पद से अयोग्य ठहराया गया था। हाईकोर्ट के फैसले के बाद खैरताबाद विधानसभा सीट रिक्त घोषित की गई थी।
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए KTR ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि दानम नागेंद्र की अयोग्यता से बचने की कोशिश को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है और हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर दल-बदल के जरिए जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। KTR ने कहा कि राहुल गांधी और रेवंत रेड्डी को लगा कि वे दल-बदल के जरिए जनादेश हासिल कर सकते हैं और विधानसभा अध्यक्ष के पीछे छिप सकते हैं। उन्होंने खैरताबाद सीट पर होने वाले उपचुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि जनता जल्द ही सरकार के तीन साल के कार्यकाल पर अपना फैसला सुनाएगी।
दानम नागेंद्र ने नवंबर 2023 में हुए तेलंगाना विधानसभा चुनाव में BRS के टिकट पर खैरताबाद सीट से जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया और 2024 के लोकसभा चुनाव में सिकंदराबाद सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नागेंद्र ने कहा कि वह अदालत के फैसले का स्वागत करते हैं और चुनाव का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ना उनके लिए कोई नई बात नहीं है और उन्हें विश्वास है कि वह फिर जीत हासिल करेंगे। उन्होंने BRS और BJP की ओर से की जा रही आलोचनाओं पर पलटवार करते हुए कहा कि इन दलों को उनकी आलोचना करने का अधिकार नहीं है और उन्हें पहले अपने पुराने फैसलों और कार्यों पर नजर डालनी चाहिए।
BRS के वरिष्ठ नेता जीवन रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से राजनीतिक जवाबदेही की मांग की। उन्होंने तेलंगाना सरकार पर जनता की आवाज दबाने और बिजली आपूर्ति को लेकर भी सवाल उठाए। वहीं, BJP नेता और अधिवक्ता करुणासागर ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची दल-बदल के मामलों में स्पष्ट प्रावधान करती है। उनके मुताबिक, निर्वाचित विधायक यदि अपने मूल राजनीतिक जनादेश से अलग होते हैं तो दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधान लागू होते हैं।