
MP News : आवारा और आक्रामक कुत्तों ने मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर की 1.81 फीसद आबादी को जख्मी किया है। मतलब 37.68 लाख लोगों में से 1.81 फीसदी यानी लगभग 68,200 लोग कुत्तों के काटने से घायल हुए हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि, ये घटनाएं इस साल सिर्फ चार महीने की ही हैं। तब भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अफसरों के चेहरे पर शिकन तक नहीं है और कुत्तों के हमलों का शिकार जख्मी अस्पतालों में दर-दर की ठोकरे तक खा रहे हैं। कुछ को सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज के इंजेक्शन मिले तो कई खुद की रकम से इंजेक्शन लगवा रहे हैं।
एमपी का व्यापारिक नगर होने के साथ साथ इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है। ऐसे में तब भी ये हालात बेहद चिंताजनक है। दो केंद्रों से 6600 कुत्तों की नसबंदी के भी आंकड़ें हैं। एकमात्र आश्रय केंद्र की क्षमता ही 300 है।
जबकि, 31.80 लाख आबादी वाले भोपाल में तीन नसंबदी केंद्र हैं। 10 हजार कुत्तों का टीकाकरण किया जा चुका है। हालांकि, भोपाल संभाग की स्थिति भी ठीक नहीं है। भोपाल, सीहोर, रायसेन, राजगढ़ और विदिशा की कुल आबादी में से 0.85 फीसद को कुत्ते जख्मी कर चुके हैं।
एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी से अप्रेल 2026 तक मध्यप्रदेश में करीब तीन लाख लोगों को आवारा कुत्तों ने जख्मी किया है। इंदौर के बाद दतिया, मुरैना और नर्मदापुरम ऐसे जिले हैं जहां सर्वाधिक लोग आवारा कुत्तों से घायल हुए। घायलों में ज्यादातर बच्चे, बुजुर्ग हैं। ये घटनाएं तब बढ़ रही हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट कई बार सरकारों को चेता चुका है। रोकथाम के लिए दिशा-निर्देश दे चुका है।
चंबल संभाग के करीब 50 लाख लोगों में से 56 हजार को कुत्तों ने जख्मी किया। ये अन्य संभाग की तुलना में सर्वाधिक हैं। जबलपुर संभाग की लगभग 1.35 करोड़ आबादी में से 0.62 फीसद शिकार हुई।
डॉग बाइट के मामले बढ़ते गए, फिर भी नसबंदी केंद्र नहीं बढ़ाए चार महीने में 7500 कुत्तों का ही टीकाकरण कराया लोग जख्मी होते रहे, तब भी 6600 कुत्तों की ही नसबंदी आक्रामक, आवारा कुत्तों को रखने का एक केंद्र। क्षमता सिर्फ 300 ज्यादातर जनप्रतिनिधि इस समस्या पर गंभीर नहीं, नियमित समीक्षा और निगरानी नहीं।
नोट : जख्मी लोगों की संख्या जिलों की कुल आबादी में से प्रतिशत में है। डिंडोरी जिले की आबादी 8.10 लाख में से 0.32 फीसद, मंडला जिले की आबादी 12.13 लाख में से 0.31 फीसद को कुत्तों ने काटा है।