
Master Plan Road MP: मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में मास्टर प्लान के अंतर्गत मेजर रोड यानी एमआर-11 और 12 का निर्माण किया जा रहा है। 150 फीट चौड़ी बन रही इन दोनों रोड में करीब 3300 मकानों के निर्माण बाधक बन रहे हैं, जिन्हें तोडऩे की तैयारी है। इसके विरोध में रहवासी उतर आए हैं, जिन्होंने कल आधे दिन का उपवास करने के साथ धरना दिया। रहवासियों के समर्थन में कांग्रेस ने भी मैदान पकड़ लिया है जो कि बड़े आंदोलन की रणनीति बना रही है।
एमआर-11 यानी निरंजनपुर (देवास नाका) से मांगलिया तक और एमआर-12 यानी उज्जैन रोड से बायपास तक 60 मीटर यानी 200 फीट चौड़ी सड़क इंदौर विकास प्राधिकरण (आइडीए) को बना रहा है, लेकिन दोनों रोड को अभी 150 फीट चौड़ा बनाया जा रहा है। टुकड़े-टुकड़े में रोड चौड़ीकरण का काम चल रहा है, क्योंकि सांवेर विधानसभा के वार्ड-35 में आने वाले रविदास नगर और श्रीराम नगर में तकरीबन 3300 मकानों के निर्माण बाधित हैं। इन 3300 मकानों में से कई तो पूरे टूटना हैं और कई मकानों के कुछ हिस्से टूटेंगे। इसके विरोध में कल तलावली चंदा में क्षेत्रीय रहवासियों ने आधे दिन का उपवास रखने के साथ धरना दिया।
धरने के समर्थन में जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े भी पहुंचे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा यदि गरीब परिवारों के घरों पर जेसीबी चली तो विरोध में सबसे आगे मैं खड़ा रहूंगा। कांग्रेस पार्टी हर कदम पर आम जन के साथ है। उन्होंने स्थानीय विधायक और मंत्री तुलसी सिलावट पर निशाना साधते हुए कहा कि मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में 3300 मकान टूट रहे हैं। परिवारों का भविष्य दांव पर है, इसकी जिम्मेदारी सीधे-सीधे मंत्री की है।
उन्होंने कहा कि जब तक इन परिवारों की समस्या का उचित समाधान नहीं निकालता तब तक वे प्रभावित परिवारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे। साथ ही आगे बड़ा आंदोलन की करने की रणनीति तैयार करेंगे। धरने में जिला कांग्रेस के कोषाध्यक्ष हितेश यादव (हनी), पूर्व पार्षद सुभाष सोलंकी, आदित्य धैर, माखन यादव, मकसूद खान, अधिवक्ता एलडी नहोरिया सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय रहवासी मौजूद थे।
मध्यप्रदेश के उज्जैन-इंदौर और भोपाल मेट्रोपोलिटन रीजन का नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। इन रीजन की सीमाएं तय कर दी हैं, अब दोनों क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मेट्रोपोलिटन अथॉरिटी का गठन होगा। साथ ही दोनों क्षेत्रों के विकास के लिए प्लान बनाने की A प्रक्रिया शुरू होगी। सरकार का फोकस भोपाल को मप्र का स्टेट कैपिटल रीजन और उज्जैन-इंदौर को सेंट्रल इंडिया का आर्थिक इंजन बनाने पर है। उसी अनुसार दोनों क्षेत्रों के कुल 28 हजार वर्ग किमी क्षेत्र के विकास की योजना तैयार की जाएगी। क्योंकि दोनों रीजन आष्टा और सोनकच्छ में एक-दूसरे से मिल भी रहे हैं।