
Indore News: परिवार में मनमुटाव हुआ और 28 साल पहले 42 साल के मदन सिंह वर्मा ने मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित घर और घरवालों को छोड़ दिया। वे राजस्थान पहुंच गए। समय बीतता गया, उनकी यादों पर घर में धूल सी जमा हो गई। अब वो 70 साल के हो गए। जोधपुर में उनकी तबीयत बिगड़ी तो एमडीएम अस्पताल के में भर्ती हुए। डॉक्टरों ने इलाज किया। अस्पताल में वृद्ध मदन बेटे - पोते से मिले तो डॉक्टरों के चेहरे पर संतोष झलका। नर्सों ने खूब सेवा की।
इसी सेवा के दौरान बुजुर्ग की की दर्दभरी कहानी सामने आई। अस्पताल प्रबंधन ने मशक्कत की और मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में रह रहे उनके बेटे को बुलाकर परिवार को फिर से एक कर दिया। मदन सिंह ने 28 साल बाद अपने बेटे और पहली बार पोते को जैसे ही देखा तो घर को कोई भी सदस्य अपने आंसू रोक नहीं पाया। घर के सभी लोग एक दूसरे से मिलने की खुशी में लिपटकर खूब रोए। इस दौरान पूरे अस्पताल का माहौल भावुक हो गया।
जोधपुर एमडीएम अस्पताल में अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित, डॉ. नवीन किशोरिया की यूनिट, डॉ. हरीश अग्रवाल और डॉ. प्रतिमा चौहान की देखरेख में इलाज शुरू हुआ। वार्ड इंचार्ज अरशद कुरैशी और नर्सिंग कर्मियों ने प्रयास कर उनके बेटे से संपर्क किया। उन्हें जोधपुर बुलाया।
पिता के जीवित होने और अस्पताल में भर्ती होने की खबर जैसे ही बेटे को लगी वो तुरंत ही अपने बेटे को लेकर जोधपुर स्थित अस्पताल पहुंच गए। जैसे ही अस्पताल में पिता को देखा माहौल भावुक हो गया। मदन ने पहली बार अपने पोते को देखा। चूंकि वे उसके जन्म से पहले ही घर छोड़ चुके थे। तीन पीढ़ियों के इतने बरसों बाद दौबारा हुए मिलन पर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
इस दौरान मदन के बेटे ने डॉक्टर - स्टाफ का आभार जताते हुए कहा कि, 'आज भी इंसानियत जिंदा है। हम अपने पिता को लेकर अबतक मायूस हो चुके थे। हमें नहीं लगता था कि, वो जिदा भी होंगे या नहीं। लेकिन, अस्पताल के डॉक्टरों के इस मानवीय व्यव्हार के चलते आज एक बार फिर इतने वर्षों बाद हम अपने पिता से मिल पाए और मेरा बेटा अपने दादा को देख सका। उन्होंने कहा कि, डॉक्टरों की इस सराहनीय सोच की वजह से ही आज हमें अपने परिवार के बड़े बुजुर्ग वापस मिल सके। उन्होंने अस्पताल स्टाफ का आभार व्यक्त किया।