
Indore news: विदेश में नौकरी, मोटी सैलरी और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर भारतीय युवाओं को साइबर अपराध के अंधेरे कारोबार में धकेले जाने की खौफनाक तस्वीर सामने आ रही है। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से पढ़े-लिखे युवाओं को थाईलैंड-म्यांमार सीमा पर बने 'केके पार्क' जैसे ठिकानों तक पहुंचाने के आरोप सामने आए है। आकर्षक जॉब ऑफर, फर्जी आधिकारिक मेल, कंपनी की वेबसाइट और चीनी-अमेरिकी प्रोफेशनल्स के नाम पर ऑनलाइन इंटरव्यू के जरिए युवाओं का भरोसा जीता जाता है।
विदेश पहुंचने के बाद असली खेल शुरू होने का दावा है। पीड़ितों के अनुसार, उनका पासपोर्ट छीन लिया जाता है और उन्हें साइबर फ्रॉड करने के लिए मजबूर किया जाता है। विरोध करने पर मारपीट, भूखा रखने और करंट के झटके देने जैसे टॉर्चर की बातें भी सामने आई है। इस पूरे नेटवर्क की सबसे खतरनाक कड़ी यह बताई जाती है कि वहां फंसे युवाओं को तब तक बाहर नहीं निकलने दिया जाता, जब तक वे किसी दूसरे युवक को नौकरी का झांसा देकर वहां पहुंचाने में सफल न हो जाएं।
ऑफिशियल मेल से शुरुआत: युवाओं को कंपनी के नाम से आधिकारिक दिखने वाली मेल आइडी से जॉब ऑफर भेजा जाता है।
विदेशी कंपनी का नाम: युवाओं को बताया जाता है कि कंपनी का मुख्यालय सिंगापुर या किसी अन्य देश में है।
प्रोफाइल से जुड़ी जानकारी: जिस पद के लिए आवेदन किया गया है, उससे संबंधित कंपनी और जॉब प्रोफाइल की पूरी जानकारी दी जाती है, ताकि ऑफर वास्तविक लगे।
60-70 हजार डॉलर का पैकेज: ऑफर मिलते ही युवा खुश हो जाते हैं। उन्हें सालाना 60 से 70 हजार डॉलर तक की सैलरी का लालच दिया जाता है। भरोसा बढ़ाने के लिए चीनी और अमरीकी लोगों के नाम पर इंटरव्यू भी लिए जाते हैं।
पासपोर्ट के बाद वीजा शुल्क: पासपोर्ट डिटेल लेने के बाद वर्क वीजा के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं। कहा जाता है कि यदि आप नहीं आए तो कंपनी का पैसा खराब हो जाएगा। इस दबाव में युवा बताए गए खाते में रकम जमा कर देते हैं।
पहली सैलरी में एडजस्टमेंट: कहा जाता है कि जमा की गई रकम पहली सैलरी में एडजस्ट कर दी जाएगी।
होटल और परिवार के नाम पर भी पैसाः विदेश आने पर 15 दिन होटल बुक कराने की बात कहकर उसका चार्ज एडवांस मांगा जाता है। पत्नी या परिवार साथ आ रहा हो तो उनके ठहरने की फीस के नाम पर भी रकम वसूली जाती है, यानी नौकरी मिलने से पहले ही अलग-अलग बहानों से लाखों रुपए वसूल लिए जाते हैं।
हाल ही में गृह मंत्रालय ने म्यांमार से 156 लोगों को रेस्क्यू कराया था और उन्हें भारत लाया गया था। एक अनुमान के मुताबिक, आज भी भारत के करीब 20 से 25 हजार युवा स्कैमर्स के गढ़ में फंसे हुए हैं। यह भी सामने आया है कि वहां फंसे लोगों को तब तक छोड़ा नहीं जाता, जब तक वे अपने स्थान पर किसी नए व्यक्ति को विदेश में नौकरी का सपना दिखाकर वहां नहीं पहुंचा देते। भारत लौटने के बाद कई पीड़ित अपनी आपबीती बताते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा एवं साइबर इंटेलिजेंस विशेषज्ञ अमित कुमार दुबे के अनुसार, विदेशी स्कैमर किसी तरह युवाओं को नौकरी का लालच देकर विदेश बुलाने में सफल हो जाते हैं। उदाहरण के तौर पर थाईलैंड जॉब के लिए बुलाए गए युवक को एयरपोर्ट पर गैंग के सदस्य रिसीव करते हैं। रास्ते में उसका पासपोर्ट छीन लिया जाता है और फिर म्यांमार बॉर्डर पर ले जाकर चाइनीज माफिया के गढ़ में पहुंचाया जाता है। इस हब को 'केके पार्क' कहा जाता है। यहां बिजली जनरेटर से चलती है और हॉस्पिटल, स्कूल सहित कई सुविधाएं मौजूद होने की बात सामने आई है, लेकिन एक बार युवा यहां पहुंच जाए तो उसका निकलना मुश्किल हो जाता है। साइबर फ्रॉड के दलदल में धकेलने के लिए मारपीट और टॉर्चर किया जाता है। इसके बाद उन्हें डिजिटल अरेस्ट जैसी साइबर ठगी की स्कीम सिखाई जाती है। विरोध करने पर खाना नहीं देने और करंट के झटके लगाने तक 5 का टॉर्चर किए जाने की जानकारी न जांच में सामने आ चुकी है। युवाओं को उनकी भाषा की दक्षता के हिसाब से उसी भाषा में साइबर फ्रॉड करने के टारगेट दिए जाते हैं।