इंदौर

कभी स्वच्छता में थी 1710वीं रैंक, अब 20 हजार आबादी वाले शहरों में देपालपुर नंबर-1, एमपी के 9 शहरों को राष्ट्रीय सम्मान

National Cleanliness Award : स्वच्छ सर्वेक्षण में देपालपुर ने बड़ी छलांग लगाते हुए 20 हजार आबादी वाले शहरों की श्रेणी में पहला स्थान हासिल किया। इंदौर नगर निगम की मेंटरशिप से बदली शहर की तस्वीर। 11 नवंबर को दिल्ली में मिलेगा सम्मान, प्रगेश के 9 निकाय होंगे पुरुस्कृत।
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Updated: 8 Nov 2026, 9:14 AM IST
National Cleanliness Award
एमपी के 9 शहरों को स्वच्छता में राष्ट्रीय सम्मान (फोटो सोर्स: Patrika File)

MP News : स्वच्छ सर्वेक्षण में इस बार 11 नवंबर को दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान देश के कुल 57 शहरों को मिलने वाले पुरस्कारों में मध्य प्रदेश में स्थित देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के साथ साथ राज्य के 9 निकायों को पुरस्कार दिया जाएगा। बता दें कि, इनमें इंदौर के साथ साथ देपालपुर, बुधनी, देवास, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सागर, उज्जैन के नगरीय निकाय शामिल हैं। खास बात ये है कि, इस लिस्ट में राजधानी भोपाल का नाम शामिल नहीं है।

प्रदेश के सभी 9 शहरों को पुरुस्कार के जरिए मिलने जा रही उपलब्धियों में सबसे दिलचस्प कहानी इंदौर के मेंटर शहर देपालपुर की है। ये शहर महज दो साल पहले प्रदेश सफाई के मामले में 380 शहरों में से 378वें स्थान पर जगह बना पाया था, लेकिन इस बार देपालपुर राष्ट्रीय स्तर पर मिलने जा रहे सम्मान के लिए पहले स्थान पर चुना गया है। पिछले सर्वेक्षण में देश के 2030 शहरों में देपालपुर को 1710वीं रैंक मिली थी। अब इस बार मिलने जा रहे सम्मान में इंदौर नगर निगम की मेंटरशिप की अहम भूमिका रही है।

राष्ट्रपति मुर्मू करेंगी इन शहरों को सम्मानित

स्वच्छ सुपर लीग में प्रदेश की 7 जोड़ियां शामिल थीं, लेकिन न्योता सिर्फ एक को मिला है। देशभर के 4909 शहरों का आकलन किया गया, जिनमें से 57 शहरों को चुना गया है। 11 नवंबर को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विजेता शहरों को सम्मानित करेंगी।

स्वच्छता की रैकिंग में देपालपुर ने लगाई छलांग

25 हजार की आबादी वाले देपालपुर शहर में 3200 घर हैं। शहर के 15 वार्डों से रोजाना 19 टन गीला-सूखा कचरा निकला है। इसके लिए 65 सफाई कर्मचारी हैं। यहां 5 टन रोजाना क्षमता का मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी शेड है। जबकि, 20 टन रोजाना क्षमता के सैप्टिक टैंक से निकले मल के उपचार का प्लांट है।

इस तरह बदली तस्वीर

नगर पालिका द्वारा सबसे पहले पुराने डोर टू डोर कचरा संग्रहण करने वाले वाहनों को हटाया। इनके स्थान पर 5 नए वाहनों का इस्तेमाल किया। राज्य सरकार से 40 लाख रुपए फंड स्वच्छता कार्यो के लिए दिया गया। सिंचाई, स्वास्थ्य, नगरीय निकाय समेत अलग-अलग विभागों को जोड़कर सुधार कार्य किए गए। साथ ही, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की योजना बनाई। 30 सितंबर को इंदौर नगर निगम का देपाल नगर परिषद के साथ एमओयू हुआ। इसी के साथ तीन महीने में घरों से कचरा संग्रहण करने की व्यवस्था सुधारी गई। वहीं, जनवरी में 1250 टन कचरे का ढेर खत्म किया गया।

स्वच्छ सर्वेक्ष्ण में इस बार 10500 अंकों पर मुकाबला

पिछले स्वच्छ सर्वेक्षण में 12500 अंकों पर शहरों के बीच मुकाबला हुआ था। इस बार सर्वेक्षण में हुई देरी के कारण गारबेज फ्री सिटी (1000 अंक), वाटर प्लस (1000 अंक) के सर्वे देश के किसी भी शहर में नहीं हुए। ऐसे में इस बार 10500 अंकों पर स्वच्छता सर्वेक्षण में शामिल शहरों के बीच मुकाबला किया जाएगा।

रेस से बाहर हुआ भोपाल

समारोह में आमंत्रित किए गए मध्य प्रदेश के 9 शहरों की लिस्ट में इस बार भोपाल का नाम शामिल नहीं है। भोपाल भी सुपर स्वच्छ लीग की दौड़ में शामिल था। उसे बैरसिया का मेंटर बनाया गया था, लेकिन फाइनल सिलेक्शन के दौरान भोपाल आमंत्रण सूची में अपना स्थान कायम नहीं रख सका।

Updated on:
8 Nov 2026, 9:14 AM IST
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