
Sharad Navratri 2026: अगर आपकी लंबे समय से कोई मनोकामना नहीं पूरी हो रही है या फिर आपके विवाह में किसी प्रकार की कोई अड़चन आ रही है तो आप एक बार श्री ग्वाल भैरव कालका माता मंदिर जरूर जाइए। मध्यप्रदेश में इंदौर शहर के विजयनगर क्षेत्र में लगभग सौ साल से प्रतिष्ठित श्री ग्वाल भैरव कालका माता मंदिर के लिए कहा जाता है कैसी भी समस्या हो मातारानी सभी के दुखों को दूर कर देती है। इन मंदिर के लोगों का कहना है कि यहां पर माता रानी के ऊपर नींबी की माला अर्पण करो और भूल जाओ। यहां से कभी कोई निराश नहीं लौटता। ऐसी मान्यता है कि यहां पर सबकी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
आपको बता दें कि आगम तंत्र पर आधारित ये मंदिर का हर कोण खास विशेषता लिए हैं। इससे बमुश्किल 100 मीटर की दूरी पर मुक्तिधाम है। यह मातारानी का प्रताप ही है कि उनकी काली प्रतिमा ममत्व से भरपूर, मनमोहक है। मंदिर की व्यवस्था संभाल रहे चौथी पीढ़ी के पुजारी राहुल ने बताया कि उनके बाबा स्व. ताराचंद ने मातारानी की सेवा की। उनके बाद पुत्र इन्दरचन्द्र यादव, फिर कैलाशचंद्र और अब वह खुद राहुल यादव मंदिर की देखरेख कर रहे है। राहुल बताते हैं कि पहले मंदिर छोटा था जिसमें लाल पत्थर की काली प्रतिमा थी। यहीं से मुक्तिधाम का रास्ता जाता था। साल 1964-65 में कालका माता की बड़ी प्रतिमा जयपुर से बुलवाई गई थी। इस प्रतिमा की खासियत है यह भक्त की इच्छानुरूप दर्शन देती है। यहां नि:संतान माताओं की गोद भरने के लिए मंगलवार व शनिवार को प्रार्थना की जाती है। इसमें यजमान को सवा किलो चावल, दो नारियल, एक मीटर लाल कपड़ा एवं 250 ग्राम पताशा लेकर मंदिर आना होता है।
माता के आराधक राहुल ने बताया कि इस मंदिर की मान्यता है कि यहां पर अधिक उम्र तक शादी के टलने की स्थिति में मां आशीर्वाद देती है। जिन लोगों के विवाह में अड़चन को हल्दी की 21 गांठ अर्पित करते हैं इससे जल्द ही शहनाई बजने की स्थिति बन जाती है। जिसके चलते यहां पर काफी दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। कालका धाम में किसी भी तरह की शारीरिक पीड़ा होने पर कच्चा दूध चढ़ाते हैं। यह सब सुबह 10 बजे के पूर्व करना होता है इससे रिस कर बहने वाला दूध संकट मोचक रहता है।
कालका माता के भोग-प्रसादी में मिष्ठान्न जरूरी है। यहां पर बिना प्याज- लहसुन का सात्विक भोजन, मिष्ठान्न में रस वाली चाहे खीर, रबड़ी, मालपुआ या रस मलाई यह मां को प्रिय है। आम दिनों में सुबह 6 बजे मंदिर के पट खुलते हैं तो रात 11 बजे शयन आरती के बाद पट बंद हो जाते हैंष। लेकिन नवरात्र के दौरान रात 12 बजे तक यहां पर विशेष पूजा होती है।