
Indore news: अगर आपको हार्ट से जुड़ी कोई समस्या है और आप ईसीजी कराना चाहते है तो ये खबर आपके काम की है। कई बार लोगों के लिए हृदय की प्रारंभिक जांच (ईसीजी) कराने के लिए हर बार अस्पताल जाना संभव नहीं होता। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए एसजीएसआइटीएस के विद्यार्थियों ने एआइ और इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित पोर्टेबल हार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया है। 'आइओटी बेस्ड हार्ट मॉनिटरिंग एंड अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर कार्डियोवैस्कुलर डिजीज' नाम की इस परियोजना का उद्देश्य घर पर ईसीजी रिकॉर्ड करने, उसके रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने और हृदय की गतिविधियों में संभावित असामान्य बदलाव के संकेत मिलने पर उपयोगकर्ता को सतर्क करना है।
छात्र मयंक भार्गव और केतन रघुवंशी ने यह डिवाइस डॉ. पूजा गुप्ता के मार्गदर्शन में तैयार की है। इस पोर्टेबल डिवाइस को 'हार्ट बॉक्स' के रूप में विकसित किया गया है। इसमें तीन प्रोब की मदद से ईसीजी रिकॉर्ड किया जाता है। इन्हें शरीर पर निर्धारित स्थानों पर लगाने के बाद हृदय की विद्युत गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा सकता है। डिवाइस में मौजूद सिस्टम ईसीजी सिग्नल को प्रोसेस करता है और स्क्रीन पर हृदय की धड़कन सहित जरूरी जानकारी देखी जा सकती है।
इस सिस्टम की खासियत ईसीजी के विश्लेषण के लिए इस्तेमाल किया गया एआइ आधारित मॉडल के पैटर्न का विश्लेषण कर सिस्टम है। रिकॉर्ड किए गए ईसीजी सिग्नल संभावित असामान्यताओं की पहचान करने में मदद करता है। ऐसे संकेत मिलने पर उपयोगकर्ता को अलर्ट किया जा सकता है, ताकि जरूरत पड़ने पर वह चिकित्सकीय सलाह ले सके। सिस्टम में मोबाइल नोटिफिकेशन के साथ स्थानीय अलार्म की सुविधा भी है।
होने वाले बदलावों को समझने में इस सिस्टम के साथ मोबाइल एप्लिकेशन भी विकसित की गई है। इसमें ईसीजी सहित हृदय संबंधित रिकॉर्ड लंबे समय तक डिजिटल रूप में सुरक्षित रखे जा सकते हैं। इससे उपयोगकर्ता पुराने और नए रिकॉर्ड को एक साथ देखकर समय के साथ मदद ले सकता है। ऐप के जरिए ईसीजी की पीडीएफ रिपोर्ट भी तैयार की जा सकती है।
विद्यार्थियों का यह प्रोजेक्ट घर पर हृदय की गतिविधियों की निगरानी को आसान बनाने की दिशा में विकसित किया गया है, लेकिन इसे अस्पताल में होने वाली ईसीजी या अन्य चिकित्सकीय जांच का विकल्प नहीं माना जा सकता। एआइ द्वारा मिले संकेतों की डॉक्टर से जांच कराना जरूरी होगा। परियोजना में इस्तेमाल किए गए मशीन लर्निंग मॉडल के प्रारंभिक परीक्षण में करीब 91.3 प्रतिशत वर्गीकरण सटीकता दर्ज होने का दावा किया गया है। हालांकि यह परिणाम परियोजना के परीक्षण और उपलब्ध डाटासेट पर आधारित है।