
Indore news:मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में लर्निंग लाइसेंस की परीक्षा में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए परिवहन विभाग ने 27 अक्टूबर से वेबकैम निगरानी सिस्टम लागू किया, लेकिन एजेंटों ने चंद दिनों में ही इसका तोड़ निकालने का दावा करना शुरू कर दिया। एजेंट 1200 से 1500 रुपए लेकर घर बैठे लर्निंग लाइसेंस बनवाने का ऑफर दे रहे हैं। दावा है कि आवेदक को न आरटीओ आना पड़ेगा और न ही खुद परीक्षा देने की जरूरत होगी। पूरी प्रक्रिया वीडियो कॉल और कथित सॉफ्टवेयर की मदद से पूरी कराई जा सकती है।
दरअसल, परिवहन विभाग ने ऑनलाइन परीक्षा में होने वाली गड़बड़ी रोकने के लिए वेबकैम आधारित निगरानी शुरू की है। परीक्षा के दौरान आवेदक को कैमरे के सामने बैठना जरूरी है। इतना ही नहीं सिस्टम में पांच तरह की फेस मूवमेंट जांच भी जोड़ी गई है ताकि कोई दूसरा व्यक्ति आवेदक की जगह परीक्षा नहीं दे सके। इसके बावजूद एजेंटों के दावे बता रहे हैं कि नई व्यवस्था में भी सेंध लगाने की कोशिश जारी है।
आरटीओ के अधिकारों का कहना है की इस तरह की धोखाधड़ी में मदद करना आपराधिक कृत्य है। सिस्टम में तकनीकी सुधार के लिए एनआइसी को पत्र लिखा जाएगा। एजेंटों को भी ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होने के निर्देश दिए जाएंगे। सवाल यह है कि जब परीक्षा में पांच स्तर की फेस मूवमेंट जांच की जा रही है तो फिर आवेदक की वास्तविक मौजूदगी सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रही?
आरटीओ कार्यालय के सामने स्थित एक इमारत में कई एजेंट इस तरह की सेवाएं देने का काम कर रहे हैं। एजेंटों के ये दावे परिवहन विभाग की नई व्यवस्था की निगरानी और तकनीकी सुरक्षा पर सवाल खड़े करते हैं।
सूत्रों के अनुसार एजेंटों के काम करने के दो तरीके सामने आए हैं। पहले तरीके में आवेदक को वीडियो कॉल के जरिए परीक्षा प्रक्रिया से जोड़ा जाता है। वह दूसरी जगह बैठकर वेबकैम पर उपस्थित दिखाई देता है और एजेंट पूरी प्रक्रिया संभालता है। दूसरे तरीके में कथित सॉफ्टवेयर के जरिए सिस्टम की जांच को पार कराने का दावा किया जाता है। इस काम के लिए एजेंट 1200 रुपए लेते हैं, जबकि कुछ 1500 रुपए तक मांग रहे हैं।