
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मैप फोटो प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
Indore news: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव करने जा रहा है। प्रांत की व्यवस्था भंग करके सरकार जैसा संभागीय और राज्य स्तर पर अब गठन होगा। इसके साथ अब क्षेत्र की इकाई को भी मजबूत किया जा रहा है। अब तक दो प्रदेश को मिलाकर एक क्षेत्र होता था, लेकिन अब तीन प्रदेश होंगे। साथ में अखिल भारतीय स्तर पर होने वाले कई फैसले यहीं पर होंगे। अनुषांगिक संगठनों पर लगाम लग जाएगी जिसमें सबसे ज्यादा असर भाजपा पर होने की संभावना है। इंदौर के डेली कॉलेज में चल रही संघ की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की महत्वपूर्ण बैठक का आज समापन होने वाला है। संघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले सहित 408 प्रतिनिधि 2 नवंबर से शताब्दी वर्ष की समीक्षा के साथ संगठन के विस्तार सहित कई विषयों पर मंथन कर रहे है।
संगठन ने एक बार फिर शाखा पर फोकस करते हुए उसे मजबूत बनाने फैसला किया है जिसके लिए नए व युवा स्वयंसेवकों को जोड़कर नियमित लाने का प्रयास होगा। सूत्रों के मुताबिक बैठक में संगठन के ढांचे में बड़े बदलाव पर भी चर्चा हुई। अब तक संघ अपने हिसाब से बनी इकाइयों पर काम कर रहा था जिसमें शाखा के बाद बस्ती, फिर नगर, उसके ऊपर जिला और फिर विभाग की इकाई थी। इन सबके ऊपर प्रांत की व्यवस्था थी जो मध्य प्रदेश में तीन हैं। अब नई रचना के हिसाब से संभागीय के साथ पूरे प्रदेश की एक ही राज्य इकाई हो जाएगी। इसके अलावा तीन राज्य (प्रदेश) को मिलाकर एक क्षेत्र हो जाएगा जो अब तक दो राज्य तक सीमित था। मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ से लगे तीसरे राज्य को जोड़ा जाएगा जिसमें ओडिशा को लिए जाने की संभावनाएं अधिक बताई जा रही हैं।
शताब्दी वर्ष के जरिए संघ ने बड़ी संख्या में परिवारों को जोडऩे का काम किया जिसमें महिलाओं और युवाओं की दमदार भागीदारी रही। युवाओं को जोडऩे के लिए शहरों, गांवों और कॉलेज कैंपस में कार्यक्रम हुए। इधर, युवाओं में नशे से दूर रखने के लिए संगठन जागरुकता अभियान भी चलाने की तैयारी में है जिसमें सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं के माध्यम से काम किया जाएगा।
संघ प्रचारकों के तबादलों से लेकर कई फैसले अखिल भारतीय स्तर पर होते थे, लेकिन अब ये निर्णय क्षेत्र स्तर पर होंगे। संभाग को मजबूत करने के साथ राज्य व क्षेत्र को भी कई अधिकार दिए जा रहे हैं। हां ये जरूर है कि क्षेत्र के बाहर के फैसले बड़ी बैठक में होंगे।
नियमित शाखा साप्ताहिक- 1,01,151
मासिक मिलन- 1,10,849
शताब्दी वर्ष में नई शाखा- 13,000
नई रचना के बाद कई बदलाव होंगे जिसमें नियुक्ति राज्य व संभागीय स्तर पर होगी। वर्तमान में प्रदेश में तीन प्रांत प्रचारक थे और उनके एक एक सह प्रांत प्रचारक थे। अब राज्य में एक प्रचारक होंगे जो पूरे मध्य प्रदेश के रहेंगे। वे ही सभी अनुषांगिक संगठनों से समन्वय करने के साथ निर्णायक भूमिका में होंगे। सीधा असर भाजपा पर होगा। प्रदेश स्तर पर होने वाले फैसलों में पार्टी सीधे क्षेत्रीय प्रचारक से बात करती थी, जिसमें कई बार वे उन्हीं पर छोड़ देते थे। अब कोई भी नियुक्ति या अन्य फैसला करने से पहले पार्टी को राज्य प्रचारक से बात करना होगी। अब तक होता ये था कि तीन प्रांत प्रचारक होने की वजह से उनकी राय तो ले ली जाती थी, लेकिन मानना या नहीं मानना भाजपा के हाथ में होता था। अब उन्हें पूछकर या विचारधारा के अनुरूप ही चलना पड़ेगा।
Updated on:
4 Nov 2026, 1:40 PM IST
Published on:
4 Nov 2026, 1:40 PM IST
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