
इंदौर/ मध्य प्रदेश की आर्थिक नगरी इंदौर में जहां त्योहारी सीजन बीतने के बाद एक बार फिर कोरोना संक्रमण की रफ्तार में बढ़ोतरी दर्ज होने लगी है। वहीं, बुधवार को हाई कोर्ट इंदर खंडपीट में सरकार इस बात का जवाब नहीं दे पाई कि, अस्पतालों में कोरोना मरीजों के शवों के साथ हो रही दुर्गति को रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है। शासन को मामले में चल रही जनहित याचिका में जवाब देना था, लेकिन सरकारी वकील ने कोर्ट से इसपर जवाब देने के लिए चार हफ्तों का समय मांगा है। इधर, नीमा अस्पताल ने भी कोर्ट को जवाब देने के लिए तीन दिन के समय की मांग की थी, जिसकी मंजूरी उसे भी मिल गई है। मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी।
शहर के अस्पतालों से सामने आ चुके हैं लापरवाही के ये मामले
आपको याद हो कि, पिछले दिनों अन्नपूर्णा क्षेत्र स्थित निजी अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव बुजुर्ग की मौत के बाद उनके शव को अस्पताल के तलघर में पटक दिया गया था, जहां शव को चूहों द्वारा कुतर लिया गया था। इससे पहले शहर के सबसे बड़े सरकारी एमवायएच में भी एक शव नौ दिन तक स्ट्रेचर पर पड़े-पड़े कंकाल बन गया था। अस्पतालों की इन लापरवाहियों को लेकर याचिकाकर्ता प्रकाश जैन ने एडवोकेट निमेश पाठक के माध्यम से हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने शासन से मामले में जवाब मांगा था। बुधवार को जवाब देने के बजाय सरकार और अस्पताल ने समय मांग लिया।
याचिका में की गई ये मांग
- शवों की दुर्गति और लापरवाही बरतने वाले अस्पतालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।